मेनका गुरुस्वामी बनीं भारत की पहली LGBTQ+ राज्यसभा सांसद, जानिए कौन हैं यह दिग्गज संवैधानिक वकील
तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा, सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 खत्म कराने वाले ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा रहा नाम
नई दिल्ली। देश की राजनीति और न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी भारत की पहली LGBTQ+ समुदाय से आने वाली राज्यसभा सांसद बन गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन्हें उच्च सदन के लिए उम्मीदवार बनाया था, जहां वह निर्विरोध चुनी गईं।


राज्यसभा में ऐतिहासिक एंट्री
हाल ही में 37 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें मेनका गुरुस्वामी का नाम भी शामिल है। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें उच्च सदन भेजकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया है।
कौन हैं मेनका गुरुस्वामी?
51 वर्षीय मेनका गुरुस्वामी देश की जानी-मानी संवैधानिक वकील हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा University of Oxford, Harvard Law School और National Law School of India University जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्राप्त की है। वह लंबे समय से संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की मुखर समर्थक रही हैं।

धारा 377 केस में अहम भूमिका
मेनका गुरुस्वामी और उनकी साथी अरुंधती काटजू उस ऐतिहासिक मुकदमे का हिस्सा थीं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में 158 साल पुराने कानून धारा 377 को रद्द कर दिया था। यह फैसला LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ था।
संविधान के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प
गुरुस्वामी ने कहा कि संविधान के ‘समानता, भाईचारा और भेदभाव रहित व्यवहार’ जैसे मूल्यों ने हमेशा उनके काम को दिशा दी है। वह राज्यसभा में भी इन्हीं सिद्धांतों के साथ पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।

TMC की रणनीति का हिस्सा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, गुरुस्वामी का चयन एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पढ़े-लिखे और संवैधानिक समझ रखने वाले चेहरों को संसद में भेजा जा रहा है, ताकि विपक्ष की आवाज को मजबूती मिल सके।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस बार कई प्रमुख नाम राज्यसभा पहुंचे हैं, जिनमें केंद्रीय मंत्री रह चुके बाबुल सुप्रियो, पूर्व पुलिस प्रमुख राजीव कुमार और अभिनेत्री कोयल मलिक शामिल हैं।
