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आखिरकार ममता सरकार ने वक्फ कानून को दे दी मंजूरी, बीजेपी हमलावर

कभी ममता ने किया था विरोध, कहा था पश्चिम बंगाल में नही होने देंंगी लागू

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कानूनी बाध्यता के चलते ममता सरकार को लेना पड़ा फैसला

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में वक्फ (Waqf) संपत्तियों को लेकर एक बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य की ममता बनर्जी सरकार ने आखिरकार केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन कानून को मंज़ूरी दे दी है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमलावर हो गई है। बीजेपी ने आरोप है कि ममता बनर्जी ने शुरू में इस कानून का जोरदार विरोध किया। महीनों बाद उनकी सरकार को इसे स्वीकार करना पड़ा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि वक्फ कानून राज्य के अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है। ममता बनर्जी ने कई मौकों पर यह भी कहा था कि वह इस संशोधित वक्फ कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। लेकिन अब उनका रुख इस कानून को लेकर बदल गया है।

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अब बीजेपी ने इसे केंद्र की ताकत के आगे ममता सरकार का झुकना बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है। साथ ही ममता बनर्जी सरकार के यू-टर्न को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं। जबकि जानकारों का मानना है कि वक़्फ़ कानून केंद्र का विषय है और राज्य सरकारें इसे अनिश्चितकाल तक रोक नहीं सकती थीं। कानूनी बाध्यता के चलते ममता सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।

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ममता सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की करीब 82000 वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित समयसीमा 6 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पोर्टल (नउममकउपदवतपजल.हवअ.पद) पर अपलोड कर दिया जाय। यह जानकारी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार की देर शाम मीडिया को दी। आपको बता दें कि केंद्र ने राज्यों से छह दिसम्बर तक सभी अविवादित वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने को कहा है। इस कारण राज्य प्रशासन ने तुरंत डेटा-एंट्री की प्रक्रिया शुरू करने के लिए यह कदम उठाया है। प्रदेश के अल्पसंख्यक विभाग की ओर से 8 बिंदुओं में प्रोग्राम भी जारी किया गया है।

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यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि वह इस नए कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पारित हुआ था, तब राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 9 अप्रैल को जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा था- मैं वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी। हम 33 प्रतिशत मुसलमानों का राज्य हैं, जो सदियों से यहां रह रहे हैं। उनका संरक्षण करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन उसके बाद कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। अदालत में याचिका दाखिल करने के बावजूद सरकार को अनुकूल फैसला नहीं मिला। अधिनियम की धारा 3बी के तहत सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर डालना अनिवार्य है। राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पी. बी. सलीम ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में एक आठ बिंदुओं पर कार्यक्रम भी जारी किया है। जिसके तहत उम्मीद पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा और प्रक्रिया को समझना और मुतवल्लियों, इमामों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें/कार्यशालाएं करना भी शामिल है।

पत्र में दिये गये निर्देश के तहत इमामों, मुअज्जिनों (मस्जिद में प्रति दिन पांच वक्त की नमाज कराने के लिए अजान लगाने वाला) और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें बुलाने और उन्हें अपलोड करने प्रक्रिया समझाने को कहा गया है। जिलाधिकारियों को कहा गया है कि पोर्टल में केवल निर्विरोध संपत्तियों को ही दर्ज किया जाय। जहां भी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो वहां सुविधा केंद्र स्थापित करें। बिना किसी देरी के यह काम करने का निर्देश है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने वक्फ अधिनियम 1995 के कई प्रावधानों में संशोधन किया। इनमें से कुछ संशोधन अब भी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र के प्रस्तावित परिवर्तनों के कार्यान्वयन पर कोई रोक नहीं है। इसका अर्थ है कि राज्य को दी गयी समय-सीमा के भीतर निर्देश का पालन करना होगा। गौरतलब है कि वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कुछ बड़े प्रावधान किए गए हैं। इनमें वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिए जाने का प्रावधान है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विरोध हुआ था। 
 

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