माघ मेला विवाद : शंकराचार्य के समर्थन में खुलकर सामने आये धर्माचार्य और संत समाज, सीएम योगी ने किसे कहा ‘कालनेमि‘
मौनी अमावस्या पर पालकी से स्नान के लिए जाते समय मेला प्रशासन के रोकने पर हुआ था विवाद
मेला प्रशासन ने नोटिस भेजकर अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर खड़े कर दिये सवाल
लोगों ने पूछा-जब अम्बानी के बेटे की शादी में पीएम आशीर्वाद ले रहे थे तक समझ में नही आया था कि शंकराचार्य हैं या नही ?
प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब साधु-संतों, राजनेताओं और सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष आमने-सामने है। इधर, एक ओर मेला प्रशासन अविमुक्तेश्वनानंद के शंकराचार्य होने पर सवाल खड़ा कर दिया है तो दूसरी और संत समाज और शंकराचार्य के समर्थक पूछ रहे हैं कि जब अम्बानी के बेटे की शादी में खुद प्रधानमंत्री मोदी उनके पैर छूकर आशीर्वाद ले रहे हैं, तब समझ में नही आया कि वह शंकराचार्य हैं या नही? इसी के साथ ही सनातन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।


गौरतलब है कि मौनी अमावस्या पर मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में बैठकर गंगा स्नान के लिए जाने से रोक दिया था। इस पर शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई थी। इसके बाद बगैर स्नान किये स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में लौट गये। मेला और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और धरना दिया गया। इसी बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से शंकराचार्य को दो नोटिसें भेजकर उनके शंकराचार्य होने पर ही सवाल खडे़ कर दिये और उनको हमेशा के लिए मेला क्षेत्र में प्रतिबंधित करने तक की बात कह डाली। यह मामला सुर्खियों में आने के बाद अब संत समाज भी दो फाड़ हो गया है। बीजेपी सरकार समर्थक साधु, संत हां भी और ना भी वाली स्थिति में बयान दे रहे हैं। वहीं कई साधु संत और धर्माचार्य शंकराचार्य के समर्थन में खुल कर आ गये है। कथावाचक अनिरू़द्धाचार्य ने तो यहां तक कह दिया कि मेल प्रशासन के शंकराचार्य के चरणों में झुक कर माफी मांगनी चाहिए। विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान सामने आया। इसमें उन्होंने ‘कालनेमि‘ शब्द का इस्तेमाल किया। यह शब्द उन्होंने किसके लिए इस्तेमाल किया लोग इसके निहितार्थ निकाल रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत और सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। उनकी कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती। धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ कालनेमि प्रवृत्ति के लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर सकते हैं, ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि प्रशासन से गलती हुई है। चोटी पकड़कर अपमान किया गया। ब्राह्मणों और साधुओं से माफी मांगने में प्रशासन को क्या दिक्कत है। माफी मांग लेने में कोई बुराई नहीं होती। उन्होंने पूछा कि क्या संविधान किसी को यह अधिकार देता है कि वह किसी के बाल पकड़कर अपमान करे। कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने दोनों पक्षों को अपने लिए समान बताया। कहा कि इस मामले में संयम रखा जाना चाहिए था। भगवा धारण करने वाले संत के साथ मारपीट ठीक नहीं है और इस विवाद को तूल देने के बजाय आपसी तालमेल से सुलझाया जाना चाहिए। वृंदावन में ब्रजभूमि के संत समाज ने मांग की है कि शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक दोबारा गंगा स्नान कराया जाय। प्रयागराज में जो कुछ भी हुआ उसके लिए कुछ अधिकारी जिम्मेदार हैं। फलाहारी बाबा ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी योगी सरकार को बदनाम करना चाहते हैं और उन्होंने शंकराचार्य का अपमान किया है। स्वामी अतुल कृष्ण दास महाराज ने दोषी अधिकारियों पर जांच और कार्रवाई की मांग की है। महामंडलेश्वर रामदास महाराज ने कहा कि शंकराचार्य की पीठ भगवान शिव की गद्दी मानी जाती है और उनका अपमान पाप के समान है। मुख्यमंत्री को दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि तीर्थ स्थलों पर किसी भी तरह का एजेंडा या अहंकार लेकर नहीं आना चाहिए। किसी शंकराचार्य ही नहीं, बल्कि किसी भी साधु के खिलाफ अभद्र टिप्पणी या व्यवहार अस्वीकार्य है। आपसी लड़ाई से सनातन कमजोर होता है, जबकि बाहरी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। उधर, नागपुर में एक धर्मसभा में पश्चिमाम्नाय द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना की कड़ी निंदा की है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य के अपमान से हर सनातनी आहत है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि शंकराचार्य अच्छे से स्नान करें और इस विवाद को यहीं समाप्त किया जाय। शिवपाल यादव ने मुख्यमंत्री योगी के कालनेमि वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जब शंकराचार्य का सम्मान नहीं है तो इसका मतलब सभी संतों का अपमान है।
मथुरा में हिंदूवादी नेता और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मुकमदे के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला में ससम्मान स्नान कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि शंकराचार्य हिंदू समाज के गौरव हैं और उनका अपमान संपूर्ण सनातन समाज की भावना को आहत करता है। कुछ अधिकारी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इस बीच अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और ब्रज धर्माचार्य परिषद की संयुक्त बैठक वृंदावन स्थित उड़िया बाबा आश्रम में आयोजित की गई। बैठक में प्रयागराज माघ मेला के दौरान शंकराचार्य और बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई कथित अभद्रता और मारपीट की कड़ी निंदा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक उत्तर प्रदेश सरकार माफी नहीं मांगती तब तक स्वाभिमान यात्रा के तहत पूरे ब्रज क्षेत्र में अभियान चलाकर आंदोलन किया जाएगा।
