Jaydev Unadkat Career: भुवनेश्वर कुमार से भी लंबा रहा इंतजार! 12 साल बाद हुई टीम इंडिया में वापसी
रणजी ट्रॉफी में सौराष्ट्र को जिताने वाले जयदेव उनादकट का अंतरराष्ट्रीय संघर्ष; 4,400 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मिला मौका, जानिए क्या रहे कारण।
भदैनी मिरर स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट में किसी भी खिलाड़ी के लिए नीली जर्सी पहनना एक सपने जैसा होता है। लेकिन टीम इंडिया में जगह बनाना जितना कठिन है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल उस जगह को बरकरार रखना है। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट (Jaydev Unadkat) का करियर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है।

घरेलू क्रिकेट में विकेटों का अंबार लगाने वाले उनादकट को टीम इंडिया में दोबारा वापसी करने के लिए दिग्गज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार से भी लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की नहीं कर सके।
2010 में डेब्यू के बाद 4,400 दिनों का लंबा इंतजार
जयदेव उनादकट ने मात्र 19 साल की उम्र में 16 दिसंबर 2010 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन में अपना टेस्ट डेब्यू किया था।
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पहला मौका रहा निराशाजनक: सेंचुरियन टेस्ट में उनादकट कोई प्रभाव नहीं छोड़ सके और उन्हें बिना कोई विकेट मिले मैच समाप्त करना पड़ा। इसके तुरंत बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया।
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12 साल बाद दूसरी पारी: घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद करीब 12 साल (लगभग 4,400 दिन) बाद 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए उनादकट की भारतीय टीम में वापसी हुई।
अंतरराष्ट्रीय करियर के आंकड़े: मौकों को भुनाने में रहे नाकाम
इतने लंबे समय बाद वापसी करने के बावजूद उनादकट का अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत आगे नहीं बढ़ सका।
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टेस्ट क्रिकेट: उनादकट भारत के लिए कुल 4 टेस्ट मैच ही खेल पाए, जिनमें उनके नाम केवल 3 विकेट दर्ज हुए।
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वनडे और टी20: उन्होंने भारत के लिए 8 वनडे मैचों में 9 विकेट और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 14 विकेट हासिल किए। टी20 फॉर्मेट में एक समय उनके प्रदर्शन से काफी उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन टीम में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें लगातार मौके नहीं मिल सके।
घरेलू क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी के रहे 'किंग'
भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जयदेव उनादकट का करियर उम्मीद के मुताबिक न रहा हो, लेकिन घरेलू क्रिकेट (Domestic Cricket) में उनका रिकॉर्ड बेमिसाल है।
सौराष्ट्र के कप्तान के रूप में उनादकट ने अपनी टीम को रणजी ट्रॉफी का खिताब जिताया और एक ही रणजी सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर रहे। रेड-बॉल क्रिकेट में उनके इसी प्रदर्शन के दम पर चयनकर्ताओं ने उन्हें 12 साल बाद दोबारा मौका दिया था।
