Movie prime
Ad

Indore Water Crisis: नलों के पानी से टूटा भरोसा, बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर लोग

इंदौर में दूषित पानी से फैली उल्टी-दस्त की बीमारी, 6 मौतों की पुष्टि; गरीब और मध्यम वर्ग पर बढ़ा आर्थिक बोझ
 

Ad

 
Indore
WhatsApp Group Join Now

Ad

इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी और देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में इन दिनों पानी को लेकर गहरा संकट खड़ा हो गया है। दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद लोगों का नगर निगम के नलों से मिलने वाले पानी पर भरोसा पूरी तरह टूट गया है। हालात ऐसे हैं कि अब लोग मजबूरी में बोतलबंद या जार का पानी खरीदकर पी रहे हैं, जिससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

Ad
Ad
Ad

प्रशासन के अनुसार, भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण फैली बीमारी में अब तक 6 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जबकि 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। हालांकि, मौतों का आंकड़ा लेकर विरोधाभास बना हुआ है। कहीं यह संख्या 10 बताई जा रही है तो स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या 16 तक पहुंच चुकी है, जिनमें एक 6 महीने का बच्चा भी शामिल है।

Ad

नल के पानी से डर, बाजार से खरीद रहे पानी

मराठी मोहल्ला निवासी सुनीता ने बताया कि अब उनका परिवार नगर निगम के नल का पानी पीने से डर रहा है। उन्होंने कहा, “हमें साफ पानी का कोई सबूत चाहिए, तभी हम नल का पानी पिएंगे। फिलहाल हम बाजार से 20 से 30 रुपये में पानी के जार खरीद रहे हैं।”

Ad

सुनीता का आरोप है कि पिछले 2 से 3 साल से नलों में गंदा पानी आ रहा था, लेकिन शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बीमारी से पहले भी वे लोग फिटकरी डालकर और पानी उबालकर पीने को मजबूर थे।

चाय भी अब बोतलबंद पानी से बन रही

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंदौर जैसे स्वच्छ शहर में अब चाय दुकानदार भी बोतलबंद पानी से चाय बना रहे हैं, ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे।
चाय दुकानदार तुषार वर्मा ने बताया कि सुरक्षा के लिए बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद चाय की कीमत नहीं बढ़ाई गई है।

प्रशासन ने शुरू किया जागरूकता अभियान

स्थानीय प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि एनजीओ कार्यकर्ता भगीरथपुरा क्षेत्र में लोगों को 15 मिनट तक पानी उबालकर पीने और फिलहाल नगर निगम के टैंकरों से सप्लाई किए जा रहे पानी का ही उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में पानी की पाइपलाइनों और ट्यूबवेल में क्लोरीनेशन का काम तेजी से किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्लोरीन मिलाना पानी को बैक्टीरिया और वायरस से मुक्त करने का प्रभावी तरीका है।

प्रशासनिक कार्रवाई, अधिकारी निलंबित

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव के तबादले और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव के निलंबन के आदेश दिए हैं।
सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि दूषित पानी से फैली डायरिया की स्थिति अब नियंत्रण में है और हालात पर मिनट-टू-मिनट निगरानी की जा रही है, ताकि दोबारा संक्रमण न फैले।

नर्मदा पर निर्भर है इंदौर

इंदौर की जलापूर्ति मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है, जहां से खरगोन जिले के जलूद क्षेत्र से करीब 80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए पानी लाया जाता है। शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन नल से पानी की सप्लाई होती है।
देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में इस जल संकट ने प्रशासन और सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

(साभार- द हिन्दू)

Ad