रिकॉर्ड निचले स्तर पर भारतीय रुपया: पहली बार ₹90 के पार डॉलर, आखिर क्यों टूटा करंसी का दम?
डॉलर के मुकाबले रुपया 90.14 के सर्वकालिक निचले स्तर पर; विदेशी निवेशकों की बिकवाली, आरबीआई की सीमित दखलअंदाजी और तेल की बढ़ी कीमतें बनीं बड़ी वजह
भारतीय रुपये ने बुधवार को इतिहास में पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर का स्तर तोड़ दिया। शुरुआती कारोबार में रुपया 27 पैसे टूटकर ₹90.14/$ पर खुला, जो अब तक का सर्वकालिक निचला स्तर है। इस तेज गिरावट ने आम जनता, आयातकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है।


बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के साथ बड़े व्यापार समझौते में देरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की भारी मांग रुपये को भारी दबाव में ला रही है।
अचानक क्यों टूटा रुपये का रिकॉर्ड?
अमेरिका से व्यापार समझौता अटका
विश्लेषकों के अनुसार, भारत–अमेरिका के बीच प्रमुख व्यापार समझौते के फाइनल होने में देरी हो रही है। इसका सीधा असर विदेशी निवेश धाराओं पर पड़ा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और रुपया दबाव में चला गया।

RBI ने नहीं किया बड़ा हस्तक्षेप
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को बचाने के लिए ज्यादा आक्रामक हस्तक्षेप नहीं किया। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया और नीचे फिसल गया।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) तेजी से पैसा निकाल रहे हैं।
नतीजा:

- डॉलर की डिमांड तेज
- रुपये पर जबरदस्त दबाव
कंपनियों और आयातकों की डॉलर खरीदारी
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार,
- बड़ी कंपनियां
- आयातक
- विदेशी फंड
…सब भारी मात्रा में डॉलर खरीद रहे हैं।
इससे बाजार में डॉलर की मांग और बढ़ गई, जबकि उपलब्ध सप्लाई कम रही।
कच्चे तेल की कीमतों में आग
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है— तेल महंगा = ज्यादा डॉलर की जरूरत, ज्यादा डॉलर = रुपया कमजोर
तेल महंगा होने से आगे चलकर पेट्रोल–डीजल और महँगाई दोनों बढ़ने का खतरा है।
दो दिनों में ही बड़ी गिरावट
- सोमवार: रुपया 89.53 पर बंद
- मंगलवार: रुपये ने और 42 पैसे खोकर 89.95 पर बंद
- बुधवार: पहली बार 90.14 तक लुढ़क गया
यानी सिर्फ 48 घंटों में रुपये ने रिकॉर्ड कमजोरी दिखाई।
