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राम मंदिर ध्वजारोहण पर पाक की टिप्पणी पर भारत का पलटवार: बोला– लेक्चर देने का नैतिक अधिकार नहीं

विदेश मंत्रालय ने कहा-पाकिस्तान पहले अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड पर नजर डाले, अयोध्या कार्यक्रम पर अनर्गल टिप्पणी स्वीकार नहीं

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नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणी उस पर ही भारी पड़ गई है। भारत ने बुधवार को पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए साफ कहा कि कट्टरता और अल्पसंख्यकों पर दमन के गहरे रिकॉर्ड वाला देश दूसरों को लेक्चर देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रखता।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को दिखावटी बयानबाजी और पाखंडी उपदेश देने के बजाय अपने “खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड” पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमने पाकिस्तान की टिप्पणी देखी है और उसे उसी बेइज्जती के साथ खारिज करते हैं जिसके वह हकदार है। जिस देश का अल्पसंख्यकों पर दमन, कट्टरता और प्रणालीगत अत्याचार का लंबा इतिहास रहा है, उसे किसी अन्य देश को उपदेश देने का अधिकार नहीं।”

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पाकिस्तान ने ध्वजारोहण पर जताई थी आपत्ति

अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भगवान राम के मंदिर पर भगवा ध्वज फहराए जाने के विश्व-ऐतिहासिक कार्यक्रम पर पाकिस्तान ने अनर्गल टिप्पणी करते हुए इसे ‘माइनॉरिटीज पर दबाव’ और ‘मुस्लिम विरासत मिटाने की कोशिश’ बताया था। भारत ने इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया।

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“500 साल का घाव भर रहा है” - पीएम मोदी

ध्वजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इसे *“युगांतकारी क्षण”* बताते हुए कहा कि सदियों पुराने घाव भर रहे हैं और राष्ट्र 500 वर्षों के संकल्प को पूरा होते देख रहा है। इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।


विदेश मंत्रालय ने शंघाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अरुणाचल की निवासी भारतीय नागरिक प्रेमा थांगडोक की मनमानी हिरासत पर चीन को कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया है।

जायसवाल ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। चीन चाहे जितना इनकार करे, इस तथ्य को बदला नहीं जा सकता।”
भारत ने बीजिंग और नई दिल्ली दोनों जगह औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

शेख हसीना प्रत्यर्पण अनुरोध पर भारत की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए पड़ोसी देश के अनुरोध पर भारत ने कहा है कि औपचारिक आवेदन प्राप्त हो चुका है और इसकी विस्तृत समीक्षा जारी है।
जायसवाल ने कहा कि भारत, बांग्लादेश के लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर पूरी तरह गंभीर है और सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखेगा।