जैसलमेर में प्रशासन का अब तक का सबसे बड़ा बुलडोजर एक्शन, 400 बीघा सरकारी जमीन से हटाए 300 अवैध कब्जे
Jaisalmer Encroachment Drive: पूर्व महारावल बृजराज सिंह के नाम आरक्षित भूमि पर भूमाफियाओं का खेल खत्म, छावनी बना इलाका
जैसलमेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां सरकारी भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ नगर परिषद और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से अब तक का सबसे बड़ा 'बुलडोजर एक्शन' शुरू किया है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बाड़मेर रोड, एयरपोर्ट रोड और सुदासर क्षेत्र में फैले अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। जेसीबी और भारी मशीनों की मदद से करीब 300 कच्चे-पक्के मकानों और झोपड़ियों को ध्वस्त कर करोड़ों रुपये मूल्य की लगभग 400 बीघा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है।


इस बड़ी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था, ताकि कोई भी अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो सके।
पूर्व महारावल बृजराज सिंह के नाम आरक्षित थी करोड़ों की जमीन
नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, जिस जमीन पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है, वह सरकारी रिकॉर्ड में पूर्व महारावल बृजराज सिंह के नाम से दर्ज आरक्षित राजकीय भूमि है। आरोप है कि लंबे समय से सक्रिय भूमाफिया इस बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर छोटे-छोटे प्लॉट काट रहे थे और भोले-भाले लोगों को वैध बताकर मोटी रकम में बेच रहे थे। धीरे-धीरे इस इलाके में सैकड़ों कच्चे-पक्के मकान और झोपड़ियां बन गईं।

300 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त, 1200 लोग प्रभावित
प्रशासन के इस अचानक हुए एक्शन से करीब 300 से अधिक अवैध ढांचे हटाए गए हैं। इस कार्रवाई के कारण करीब 1,200 लोगों के सामने अचानक रहने और खाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मकान खाली करने या अपना घरेलू सामान निकालने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे उनका काफी नुकसान हुआ है। लोगों का कहना है कि वे यहाँ वर्षों से रह रहे थे और इस कार्रवाई से उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।

नगर परिषद का पक्ष: पहले जारी किया गया था सार्वजनिक नोटिस
इन आरोपों पर नगर परिषद के राजस्व अधिकारी पवन कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कार्रवाई पूरी तरह नियमसंगत है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर चलाने से पहले समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी कर लोगों को सूचित किया गया था। यदि किसी भी व्यक्ति के पास इस भूमि से संबंधित कोई वैध दस्तावेज होते, तो वह प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर सकता था, लेकिन चूंकि यह भूमि पूरी तरह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, इसलिए इस पर किसी का व्यक्तिगत स्वामित्व संभव ही नहीं है।
आयुक्त लजपत सिंह सोढ़ा की चेतावनी- 'कब्जा बर्दाश्त नहीं'
नगर परिषद आयुक्त लजपत सिंह सोढ़ा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 400 बीघा भूमि को मुक्त कराया जा चुका है और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
आयुक्त की आम जनता से अपील: "नागरिक किसी भी भूखंड या प्लॉट को खरीदने से पहले उसके स्वामित्व संबंधी कागजात की पूरी बारीकी से जांच करें। नगर परिषद की स्वीकृति और आवश्यक एनओसी (NOC) के बिना कोई भी प्लॉट न खरीदें, अन्यथा भूमाफियाओं के चक्कर में फंसकर भविष्य में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।"
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जैसलमेर शहर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अन्य अवैध कब्जों को चिह्नित करने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सर्वे पूरा होते ही भूमाफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आगे भी इसी तरह का बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा।
