कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने वाली IAS रिंकू ढुग्गा की बहाली पर रोक
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में दी चुनौती; सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया अंतरिम स्थगनादेश
नई दिल्ली / भदैनी मिरर: दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को अपने कुत्ते को टहलाने के लिए खाली कराने के चर्चित विवाद में घिरीं पूर्व आईएएस अधिकारी रिंकू ढुग्गा की सेवाओं में वापसी पर देश की सर्वोच्च अदालत ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने अधिकारी के अनिवार्य रिटायरमेंट (Compulsory Retirement) के आदेश को रद्द कर दिया था।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर संबंधित आईएएस अधिकारी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि अग्रिम आदेश तक अधिकारी की पुनर्बहाली पर रोक प्रभावी रहेगी।

क्या है पूरा मामला?
1994 बैच की एजीएमयूटी कैडर की आईएएस अधिकारी रिंकू ढुग्गा और उनके पति पर आरोप लगा था कि वे अपने कुत्ते को टहलाने के लिए दिल्ली सरकार के त्यागराज स्टेडियम को एथलीटों और खिलाड़ियों से समय से पहले ही जबरन खाली करा लेते थे। मामले के तूल पकड़ने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें 'अनिवार्य सेवानिवृत्ति' दे दी थी।

ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट का रुख
रिंकू ढुग्गा ने अनिवार्य रिटायरमेंट के फैसले को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में चुनौती दी, जहां से फैसला उनके पक्ष में आया। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 15 अप्रैल को कैट के आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट का तर्क था कि अनिवार्य रिटायरमेंट का नियम केवल 'डेडवुड' (यानी अक्षम या निकम्मे अधिकारियों) पर लागू होता है, जबकि अधिकारी की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) में रिकॉर्ड उत्कृष्ट (Outstanding) थे।
हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब इस चर्चित और महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
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