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IAF Mega Plan: 114 राफेल, नए AWACS और MTA से बढ़ेगी ताकत, 3.25 लाख करोड़ की मेगा डील तैयार

वायुसेना के आधुनिकीकरण को बड़ा बूस्ट, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होंगे नए फाइटर जेट तैयार

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी युद्धक क्षमता और तकनीकी ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार कई बड़े रक्षा सौदों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रही है। इसमें 114 राफेल लड़ाकू विमान, 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) और अत्याधुनिक एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AWACS) सिस्टम की खरीद शामिल है।

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114 राफेल जेट्स: 3.25 लाख करोड़ की मेगा डील

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के तहत 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।

खास बात यह है कि ये विमान ‘मेक इन इंडिया’ के तहत फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation और भारतीय साझेदार के साथ मिलकर भारत में ही बनाए जाएंगे।

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पूंजीगत बजट में 37% की बढ़ोतरी

संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के मुकाबले वायुसेना के पूंजीगत बजट में 37.03% की बढ़ोतरी की गई है। इस बजट का उपयोग प्रमुख सैन्य परियोजनाओं पर किया जाएगा, जिनमें फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, ड्रोन और कॉम्बैट सिस्टम शामिल हैं।

पुराने An-32 की जगह लेंगे नए MTA

वायुसेना 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना पर भी काम कर रही है, जिसकी लागत लगभग 1 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसका उद्देश्य पुराने Antonov An-32 विमानों को बदलना है।

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इस डील में 12 विमान विदेश से तैयार हालत में खरीदे जाएंगे, जबकि 48 का निर्माण भारत में किया जाएगा। इस रेस में Embraer, Lockheed Martin और Airbus जैसी कंपनियां शामिल हैं।

AWACS और कॉम्बैट इनेबलर्स से बढ़ेगी ताकत

आधुनिक युद्ध में खुफिया जानकारी और रियल-टाइम निगरानी बेहद अहम हो गई है। ऐसे में AWACS सिस्टम, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस प्लेटफॉर्म वायुसेना की क्षमता को कई गुना बढ़ाएंगे।

ये सिस्टम युद्ध के दौरान कमांडरों को सटीक जानकारी और रणनीतिक बढ़त प्रदान करेंगे।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

वायुसेना ने स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘डायरेक्टरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन’ (DAD) का गठन किया है। यह संस्था नई तकनीकों पर रिसर्च कर उन्हें रक्षा प्रणाली में शामिल करने का काम करेगी।

इस पहल का मकसद भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और विदेशी निर्भरता को कम करना है।

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