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कानून में 'मैरिटल रेप एक्सेप्शन' होने के बावजूद पति पर केस कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल

केंद्र सरकार का हलफनामा: वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने का विरोध, कहा- घरेलू हिंसा और अन्य सुरक्षात्मक कानून मौजूद

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Supreme Court
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नई दिल्ली । भारतीय दंड संहिता (IPC) और नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत शादी के बाद 'वैवाहिक बलात्कार' (Marital Rape) से दी गई छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज हो गई है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाया कि जब तक कानून में 'मैरिटल रेप एक्सेप्शन' (छूट) का संवैधानिक प्रावधान मौजूद है, तब तक क्या किसी पति के खिलाफ पत्नी के साथ रेप का आपराधिक केस चलाया जा सकता है?

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कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के संदर्भ में उठा सवाल

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह सवाल कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले के संदर्भ में उठाया, जिसमें हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 376 के तहत तय आरोपों को सही ठहराया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "जब तक हम इस छूट की संवैधानिक वैधता पर फैसला नहीं ले लेते, क्या मुकदमा चलाने की अनुमति दी जा सकती है? हम पीड़ितों की सुरक्षा करेंगे, लेकिन क्या स्पष्ट कानूनी छूट के बावजूद किसी व्यक्ति पर यह केस चलाना अभियोजन के अधिकार क्षेत्र में आता है?"

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केंद्र सरकार ने किया वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने का विरोध

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, केंद्र ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने का विरोध किया है। केंद्र का तर्क है कि शादीशुदा महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय कानून में घरेलू हिंसा और क्रूरता जैसे कई अन्य उपाय पहले से मौजूद हैं। वैवाहिक संबंध में 'बलात्कार' जैसा गंभीर अपराध लागू करना अत्यधिक कठोर हो सकता है। सरकार के मुताबिक, यह मुद्दा कानूनी से ज्यादा सामाजिक है और विधायी नीति (Legislative Policy) के दायरे में आता है।

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दो प्रमुख बिंदुओं पर विचार करेगी अदालत

सीनियर एडवोकेट करुणा नंदी, इंदिरा जयसिंह, गोपाल शंकरनारायणन, सिद्धार्थ दवे और कॉलिन गोंसाल्वेस समेत अन्य वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह दो मुख्य सवालों पर विचार करेगा:

  1. क्या मैरिटल रेप एक्सेप्शन (MRE) के बने रहने के बावजूद पति पर मुकदमा चलाया जा सकता है?

  2. क्या MRE का प्रावधान खुद ही असंवैधानिक होकर खत्म हो जाता है?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है, जिसकी तिथि जल्द घोषित की जाएगी।