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High Court: "देवी सरस्वती शिक्षा का प्रतीक, पर अब यह सिर्फ मुनाफा कमाने का धंधा"; स्कूल में छात्रा की मौत पर कोर्ट का सख्त रुख

स्कूलों पर भड़का High Court, कहा- "मुनाफे का धंधा बनी शिक्षा"

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डेस्क, भदैनी मिरर: देश में शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण और स्कूलों की मनमानी पर मद्रास हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। एक मासूम छात्रा की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि जिस देश में शिक्षा देना कभी एक पवित्र सेवा माना जाता था, आज वह केवल एक लाभदायक व्यवसाय (Profitable Business) बनकर रह गया है।

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क्या है पूरा मामला?

यह संवेदनशील मामला तमिलनाडु के तेनकासी का है। पिछले साल मार्च में एक निजी स्कूल के परिसर के भीतर ही यूकेजी (UKG) में पढ़ने वाली एक मासूम बच्ची की गाड़ी से कुचलकर मौत हो गई थी। बच्ची के पिता का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने इस जघन्य घटना को महज एक 'साधारण दुर्घटना' बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की। इंसाफ न मिलता देख पिता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले की जांच CB-CID को सौंपने की मांग की।

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कोर्ट की पुलिस और स्कूल प्रबंधन को फटकार

जस्टिस पुगलेंधी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जांच में पाई गई खामियों पर गहरा दुख जताया। कोर्ट ने कहा:

  • सूचना छिपाना: स्कूल प्रबंधन ने गाड़ी और आरोपियों की जानकारी समय पर पुलिस को क्यों नहीं दी? इससे आरोपियों को भागने का मौका मिला।

  • पुलिस की सुस्ती: एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई और शुरुआती रिपोर्ट में आरोपियों के नाम तक गायब थे।

  • सीसीटीवी का रहस्य: पिता को सीसीटीवी फुटेज दिखाने से मना किया गया, जिससे स्कूल की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है।

"देवी सरस्वती को हम शिक्षा की देवी मानते हैं, लेकिन आज शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। सेवा की जगह अब मुनाफे ने ले ली है।" - जस्टिस पुगलेंधी

जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी को निर्देश

अदालत ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि इस व्यवस्था में अक्सर गरीब पीड़ितों को न्याय के लिए भटकना पड़ता है। कोर्ट ने तेनकासी के पुलिस अधीक्षक (SP) को आदेश दिया कि इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस से वापस लेकर किसी ईमानदार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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