पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग से भड़के गिग वर्कर्स, कल 5 घंटे की देशव्यापी हड़ताल; ठप हो सकती हैं Swiggy-Zomato और Ola-Uber सेवाएं
ईंधन के दाम बढ़ने और LPG संकट से डिलीवरी पार्टनर्स की कमर टूटी, ₹20 प्रति किमी न्यूनतम रेट तय करने की मांग
नई दिल्ली / बिजनेस डेस्क। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹3 प्रति लीटर की अचानक हुई बढ़ोतरी ने ऑनलाइन डिलीवरी और ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स (Gig Workers) के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। पिछले करीब चार वर्षों में देशव्यापी स्तर पर ईंधन की कीमतों में यह पहली बड़ी बढ़ोतरी है। इसके विरोध में 'गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन' (GIPSWU) ने रविवार दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ऐप-आधारित सेवाओं को पूरी तरह से बंद रखने यानी 5 घंटे की हड़ताल का एलान किया है।


यूनियन ने डिजिटल कंपनियों से प्रति किलोमीटर सर्विस रेट में तत्काल बढ़ोतरी करने की पुरजोर मांग की है।
1.2 करोड़ वर्कर्स पर पड़ेगा सीधा असर
यूनियन ने चेतावनी दी है कि ईंधन के दामों में हुई इस अप्रत्याशित वृद्धि से देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स बुरी तरह प्रभावित होंगे। ये वो कर्मचारी हैं जो अपनी दैनिक आजीविका के लिए पूरी तरह मोटरसाइकिल, स्कूटर या कारों पर निर्भर हैं। जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह माना जा रहा है।

दोहरी मार: LPG संकट से डिलीवरी ऑर्डर्स में 70% तक की भारी गिरावट
ईंधन की मार के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में चल रहे एलपीजी (LPG) संकट ने गिग वर्कर्स की मुसीबत को दोगुना कर दिया है। एलपीजी की किल्लत के कारण कई रेस्तरां और क्लाउड किचन ने या तो अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं या वे अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं।
होटलों से भोजन की आपूर्ति ठप होने के कारण फूड डिलीवरी के ऑर्डर वॉल्यूम में 50% से लेकर 70% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति उन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बेहद गंभीर है, जिनकी दैनिक कमाई पूरी तरह से ऑर्डरों की संख्या पर मिलने वाले इंसेंटिव (Incentive) पर टिकी होती है।

"₹20 प्रति किलोमीटर का न्यूनतम रेट तय करे सरकार और कंपनियां"
GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने इस ईंधन बढ़ोतरी को महंगाई और भीषण गर्मी से जूझ रहे श्रमिकों पर सीधा प्रहार बताया है। उन्होंने कहा:
"Swiggy, Zomato, Blinkit और अन्य कंपनियों के डिलीवरी वर्कर्स अब इस बढ़े हुए जेब खर्च का बोझ उठाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं। हम सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मांग करते हैं कि वर्कर्स के लिए कम से कम ₹20 प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए।"
यूनियन ने आगाह किया है कि यदि ईंधन और वाहनों के रखरखाव के खर्च के अनुपात में कर्मचारियों की कमाई नहीं बढ़ी, तो कई लोग इस सेक्टर को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस संकट का सबसे बुरा असर महिला गिग वर्कर्स, डिलीवरी एजेंटों और ड्राइवरों पर पड़ रहा है, जिनमें से कई विपरीत मौसम और भारी ट्रैफिक के बीच रोजाना 10 से 14 घंटे हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं।
कल इन प्रमुख सेवाओं पर दिखेगा हड़ताल का असर
कल होने वाले 5 घंटे के इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वर्कर्स के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। इसके कारण रविवार दोपहर को ग्राहकों को नीचे दी गई सेवाओं में देरी या अनुपलब्धता का सामना करना पड़ सकता है:
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फूड और ग्रोसरी डिलीवरी: Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto.
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कैब और ऑटो बुकिंग: Ola, Uber, Rapido.
चुनौतियों के बीच बढ़ रहा है गिग इकोनॉमी का दायरा
नीति आयोग के अनुमानों के मुताबिक, मौजूदा चुनौतियों के बावजूद भारत में इस सेक्टर का विस्तार तेजी से हो रहा है। वर्ष 2020-21 में भारत में गिग वर्कर्स की संख्या जहां 77 लाख थी, वहीं वर्ष 2029-30 तक इसके बढ़कर 2.3 करोड़ से अधिक होने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में इन कर्मियों की आजीविका को सुरक्षित करना उद्योगों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
