FASTag Rules: सावधान! अगर आपने भी की ये 'चालाकी' तो ब्लैकलिस्ट होगा फास्टैग, देना पड़ेगा दोगुना टोल टैक्स
NHAI की चेतावनी: विंडस्क्रीन पर फास्टैग न चिपकाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई.
नई दिल्ली (भदैनी मिरर): यमुना एक्सप्रेस-वे हो या फिर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, अब हाईवे पर सफर के दौरान फास्टैग (FASTag) को लेकर की गई एक छोटी सी लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने फास्टैग यूजर्स द्वारा की जा रही एक खास 'चालाकी' को पकड़ लिया है और इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सख्त चेतावनी जारी की है.


विंडस्क्रीन पर चिपकाना है अनिवार्य
NHAI के संज्ञान में आया है कि बहुत से कार चालक फास्टैग को विंडस्क्रीन पर स्थाई रूप से चिपकाने के बजाय एक 'ट्रांसपेरेंट पॉकेट' (पारदर्शी जेब) लगा देते हैं. वे एक्सप्रेस-वे पर पहुंचते ही फास्टैग को उस पॉकेट में रख देते हैं और सफर खत्म होने के बाद उसे निकाल लेते हैं. अथॉरिटी ने साफ किया है कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ है. फास्टैग को विंडस्क्रीन पर स्पष्ट रूप से पेस्ट किया जाना चाहिए ताकि वह आसानी से ट्रैक हो सके.

क्यों हो सकता है ब्लैकलिस्ट?
अथॉरिटी को आशंका है कि लोग एक ही फास्टैग का इस्तेमाल दूसरी कारों में करने के लिए उसे विंडस्क्रीन पर नहीं चिपका रहे हैं. NHAI ने कहा है कि यदि फास्टैग सही जगह पर चिपका हुआ नहीं पाया गया, तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.
जेब पर पड़ेगा डबल बोझ

अगर आपका फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो जाता है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं होता, तो टोल प्लाजा के गेट आपके लिए नहीं खुलेंगे. ऐसी स्थिति में आपको टोल प्लाजा पर कैश में भुगतान करना होगा और नियम के मुताबिक, आपको दोगुना टोल टैक्स देना पड़ सकता है.
FASTag: एक नजर में
फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है जो आपके वॉलेट अकाउंट से लिंक होता है. जैसे ही आपकी कार टोल लेन में आती है, सेंसर विंडस्क्रीन पर लगे टैग को स्कैन करता है और टोल की राशि अपने आप कट जाती है, जिससे समय की बचत होती है और गेट खुल जाते हैं.
