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छात्रों की आत्महत्या या अप्राकृतिक मौत की सूचना तुरंत पुलिस को दें शिक्षण संस्थान: सुप्रीम कोर्ट

उच्च शिक्षण संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश, यूजीसी को देनी होगी वार्षिक रिपोर्ट

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नई दिल्ली (पीटीआई)। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी छात्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की जानकारी मिलते ही तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस जिम्मेदारी से कोई भी शिक्षण संस्थान पीछे नहीं हट सकता।

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गुरुवार को जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का यह मूलभूत कर्तव्य है कि वे छात्रों को सुरक्षित, समान, समावेशी और शिक्षा के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएं। अदालत ने कहा कि छात्र चाहे नियमित कक्षाओं में पढ़ रहे हों, दूरस्थ शिक्षा में हों या ऑनलाइन माध्यम से अध्ययन कर रहे हों—यह निर्देश सभी पर समान रूप से लागू होंगे।

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कैंपस के बाहर की घटनाएं भी होंगी शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि छात्रों की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना देने की बाध्यता केवल कैंपस या छात्रावास तक सीमित नहीं होगी। इसमें परिसर के बाहर घटित सभी ऐसी घटनाएं भी शामिल होंगी, जिनकी जानकारी संस्थान को मिलती है।

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यूजीसी को देनी होगी वार्षिक रिपोर्ट

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की आत्महत्या और अप्राकृतिक मौतों से संबंधित वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े नियामक निकायों को प्रस्तुत करनी होगी।

24 घंटे चिकित्सा सुविधा अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रत्येक आवासीय उच्च शिक्षण संस्थान में चौबीसों घंटे चिकित्सा सहायता उपलब्ध होनी चाहिए। यदि परिसर के भीतर यह सुविधा उपलब्ध न हो, तो अधिकतम एक किलोमीटर के दायरे में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों को समय पर इलाज मिल सके।

चार महीने में भरने होंगे रिक्त पद

शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक और निजी, दोनों प्रकार के शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया कि वे सभी रिक्त संकाय पदों को चार महीने के भीतर भरें। इसमें शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों श्रेणियों के पद शामिल होंगे। साथ ही हाशिए पर पड़े और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करना है। आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी संस्थानों की होगी।

 

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