दिशा सालियान केस: पिता सतीश का CBI के सामने बड़ा बयान, आदित्य ठाकरे
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आई CBI; पिता और वकील ने सुशांत सिंह राजपूत केस से जुड़े तारों और डिजिटल सबूतों का किया दावा।
भदैनी मिरर डेस्क, मुंबई/वाराणसी: दिवंगत दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख और दिए गए निर्देशों के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को दिशा के पिता सतीश सालियान ने सीबीआई के समक्ष अपना विस्तृत बयान दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने जांच अधिकारियों के सामने कई बड़े राजनीतिक व बॉलीवुड हस्तियों के नामों का खुलासा किया है।

CBI के सामने दर्ज हुआ बयान, सतीश बोले— 'सत्य कभी पराजित नहीं होता'
सीबीआई के डीएसपी पूरन कुमार की देखरेख में सतीश सालियान का बयान दर्ज किया गया। सतीश सालियान ने बताया कि उन्होंने अपने बयान में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और सुशांत सिंह राजपूत के बॉडीगार्ड समेत कई लोगों के नाम अधिकारियों को सौंपे हैं।

बयान दर्ज कराने के बाद मीडिया से बातचीत में सतीश सालियान ने कहा, "मैंने अधिकारियों को केवल वही बातें बताई हैं जो तथ्य मेरे सामने हैं। काफी समय तक हमारी आवाज नहीं सुनी गई, लेकिन मुझे ईश्वर पर पूरा भरोसा है। सत्य कभी पराजित नहीं होता और जिधर सत्य है, वहां भगवान खड़े रहते हैं।"

दिशा और सुशांत सिंह राजपूत केस आपस में जुड़े: वकील निलेश ओझा
सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने इस मामले में कई सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि दिशा सालियान और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले सीधे तौर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
ओझा के मुताबिक, दिशा के पास आदित्य ठाकरे और उनसे जुड़े लोगों से संबंधित महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मौजूद थे, जिन्हें उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत तक पहुंचाया था। यह जानकारी रिया चक्रवर्ती तक भी पहुंची थी, जिसके बाद दिशा को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा था। वकील ने मामले में आपराधिक साजिश, हत्या और सबूत छिपाने जैसे बेहद गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सीबीआई की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक्शन मोड में एजेंसी
गौरतलब है कि 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड स्थित एक इमारत से गिरकर दिशा सालियान की मौत हो गई थी। शुरुआत में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार देते हुए फाइल बंद कर दी थी। हालांकि, परिजनों ने मौत की परिस्थितियों को संदिग्ध बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाल ही में हाईकोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज कर सीबीआई को नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने और वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में पड़ताल पूरी करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच में साक्ष्य मिलने के आधार पर ही किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
