"लोकतंत्र को हाईजैक नहीं होने देंगे", कर्नाटक चुनाव विवाद में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी; कांग्रेस विधायक को मिली बड़ी राहत
श्रृंगेरी विधानसभा सीट पर दोबारा गिनती के बाद बदले नतीजे पर शीर्ष अदालत ने लगाई रोक, बीजेपी उम्मीदवार जीवराज को लगा झटका।
नई दिल्ली/बेंगलुरु (भदैनी मिरर डेस्क):
देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार (11 मई) को चुनावी निष्पक्षता को लेकर एक बड़ी नजीर पेश की है। कर्नाटक की श्रृंगेरी विधानसभा सीट से जुड़े चुनाव विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न केवल कड़ा रुख अख्तियार किया, बल्कि 'लोकतंत्र के हाईजैक' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सख्त संदेश भी दिया। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कांग्रेस नेता TD राजगोड़ा की विधायकी को बहाल रखते हुए बीजेपी उम्मीदवार को बड़ा झटका दिया है।


क्या है सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी?
सुनवाई के दौरान जब मामला दोबारा गिनती (Re-counting) और उसके बाद बदले हुए नतीजों पर पहुंचा, तो पीठ ने भाजपा उम्मीदवार डीएन जीवराज के संदर्भ में बेहद तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, "हम आपको इस तरह लोकतंत्र को हाईजैक करने की अनुमति नहीं दे सकते।" इसके साथ ही कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए 'यथास्थिति' (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसका अर्थ है कि टीडी राजगोड़ा फिलहाल विधायक बने रहेंगे।

नतीजे बदलने पर उठा था विवाद
पूरा मामला साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। तब कांग्रेस के राजगोड़ा को 201 वोटों से विजेता घोषित किया गया था। बीजेपी उम्मीदवार जीवराज ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट के आदेश पर जब पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती हुई, तो 3 मई 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर ने जीवराज को विजेता घोषित कर दिया। इसी फैसले को राजगोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

वोटों की गिनती में हेरफेर का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में राजगोड़ा के वकील ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज पोस्टल बैलेट के सत्यापन का आदेश दिया था। आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के विरुद्ध जाकर उन 562 वैध वोटों पर भी दोबारा विचार कर लिया, जो राजगोड़ा के पक्ष में थे। इसी 'अवैध' प्रक्रिया के कारण राजगोड़ा के वोटों में कमी आई और नतीजा पलट गया।
आपराधिक मामले की भी है छाया
इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी नेता डीएन जीवराज पर पोस्टल बैलेट पेपर से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप भी हैं। कांग्रेस के चुनाव एजेंट सुधीर कुमार मुरोली ने इस संबंध में आपराधिक मामला दर्ज कराया है, जिसमें पूर्व रिटर्निंग ऑफिसर और डिप्टी कमिश्नर भी नामजद हैं। हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल जीवराज के खिलाफ चल रहे इस आपराधिक मामले पर रोक लगा रखी है।
