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Delhi-NCR Earthquake: अफगानिस्तान के हिंदुकुश में आया 6.2 तीव्रता का भीषण भूकंप

शनिवार शाम 7:04 बजे महसूस हुए तेज झटके, दहशत में घरों से बाहर भागे लोग; जानिए गहराई ज्यादा होने से क्यों टला बड़ा नुकसान

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भदैनी मिरर: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में शनिवार की शाम भूकंप के तेज झटकों से धरती कांप उठी। नेशनल जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस भूकंप का मुख्य केंद्र अफगानिस्तान का हिंदुकुश क्षेत्र था। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.2 मापी गई है, जो काफी शक्तिशाली मानी जाती है। शनिवार शाम करीब 7 बजकर 4 मिनट पर जैसे ही झटके महसूस हुए, घरों और दफ्तरों में बैठे लोग अनहोनी की आशंका में फौरन खुले मैदानों और सड़कों की तरफ दौड़ पड़े। राहत की बात यह है कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक भारत में कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

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धरती से 215 KM नीचे था केंद्र, भारत-चीन समेत 8 देशों में दिखा असर

मौसम और भूगर्भ विज्ञानियों के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से काफी ज्यादा गहराई में यानी लगभग 215 किलोमीटर नीचे था। केंद्र की गहराई (Depth) अत्यधिक होने के कारण ही इसका असर बेहद व्यापक रहा और झटके कई देशों में एक साथ महसूस किए गए। अफगानिस्तान के अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान, भारत, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान में भी धरती हिली।

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भारत की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाकों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर भारत के कुछ अन्य पहाड़ी राज्यों में झटके सबसे ज्यादा तेज थे।

गहराई ज्यादा होने से टल गई बड़ी तबाही: एक्सपर्ट्स

भूगर्भ वैज्ञानिकों (Experts) का कहना है कि भूकंप का केंद्र (Epicenter) जमीन के अंदर जितनी अधिक गहराई पर होता है, उसके झटकों का दायरा उतना ही बड़ा और विस्तृत हो जाता है। यही वजह है कि हिंदुकुश से उठा यह कंपन हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली-एनसीआर और चीन तक महसूस किया गया। हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि गहराई ज्यादा होने का एक बड़ा फायदा यह होता है कि इससे सतह पर तबाही या नुकसान होने की आशंका काफी कम हो जाती है। यदि 6.2 तीव्रता के इस भूकंप का केंद्र जमीन से महज 10 या 20 किलोमीटर नीचे होता, तो भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था।

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