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Delhi High Court: क्या देश में बैन रहेगा टेलीग्राम? हाईकोर्ट में हुई तीखी बहस, कोर्ट ने सुरक्षित रखा अपना फैसला

कानूनी पेंच: टेलीग्राम ने केंद्र के प्रतिबंध को दी चुनौती; वरिष्ठ वकील ध्रुव मेहता बोले— "पूरा ऐप ब्लॉक करना गलत, आदेश में हैं गंभीर खामियां", कोर्ट ने याद दिलाया IT Act का दायित्व।

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नेशनल डेस्क, भदैनी मिरर: नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग ऐप 'टेलीग्राम' (Telegram) पर लगाए गए अस्थाई प्रतिबंध का मामला अब देश की दहलीज से निकलकर अदालत के गलियारों में पूरी तरह गरमा गया है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस प्रतिबंध को चुनौती देने वाली टेलीग्राम की याचिका पर बृहस्पतिवार (18 जून 2026) को मैराथन सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति तेजस कारिया की एकल पीठ के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से बेहद तीखी और तकनीकी दलीलें पेश की गईं। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने इस संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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सरकारी आदेश में हैं गंभीर कानूनी खामियां: ध्रुव मेहता

अदालत में टेलीग्राम का पक्ष रखते हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने केंद्र सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेश पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि इस आदेश में साफ तौर पर कानूनी खामियां नजर आती हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक, किसी भी ऐप या सूचना पर रोक लगाने से पहले संबंधित मंत्रालय के सचिव की व्यक्तिगत संतुष्टि और उसके पीछे के ठोस लिखित कारणों का स्पष्ट उल्लेख होना अनिवार्य है। केवल पुरानी धाराओं को दोहरा देने भर से काम नहीं चलेगा।

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वरिष्ठ वकील ने कोर्ट के सामने प्रतिबंध के अधिकार और उसके स्वरूप को चुनौती देते हुए कहा, "यह कोई आपातकालीन स्थिति नहीं थी कि पूरे ऐप को ही ठप कर दिया जाए। कानूनन सिर्फ विवादित या संदिग्ध जानकारी (कॉन्टेंट) को ब्लॉक किया जा सकता है, न कि पूरे प्लेटफॉर्म को। सरकार का यह कदम आनुपातिकता के सिद्धांत (Principle of Proportionality) के पूरी तरह खिलाफ है।"

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सरकार ने किया पलटवार, कोर्ट ने याद दिलाई जिम्मेदारी

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा पेश हुए। सरकार की ओर से दलील दी गई कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तरफ से आए आपातकालीन अनुरोध के बाद यह कदम देशहित और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया था।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने टेलीग्राम को उसकी कानूनी जिम्मेदारियों का अहसास कराया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि टेलीग्राम केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) है और उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 के तहत पूरी सावधानी बरतनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 79 एक स्वतंत्र दायित्व है, जिसका धारा 69ए (ब्लॉकिंग पावर) से सीधा संबंध नहीं है।

आपातकाल था या नहीं, यह अथॉरिटी तय करेगी: कोर्ट जब टेलीग्राम के वकील ने मंत्रालय को भेजे गए एनटीए के अनुरोध पत्र का हवाला दिया, तो पीठ ने स्पष्ट कहा कि स्थिति आपातकालीन थी या नहीं, इसका फैसला संबंधित सक्षम प्राधिकरण ही करेगा। कोर्ट ने याद दिलाया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के तीन तय चरण होते हैं— जिसमें नामित अधिकारी, विभाग के सचिव और समीक्षा समिति शामिल होती है। याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि क्या इन तय चरणों का उल्लंघन हुआ है।

अब देखना यह होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट तकनीकी पहलुओं और अभिव्यक्ति व सुरक्षा के इस संतुलन पर क्या रुख अपनाता है। पूरे देश की नजरें अब अदालत के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।