CJP का 'चलो संसद' मार्च: अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल; विदेशी मीडिया में भी चर्चा
एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स वॉच ने की स्वतंत्र निष्पक्ष जांच की मांग; न्यूयॉर्क टाइम्स और द गार्जियन ने प्रमुखता से छापी झड़प और छात्रों के संघर्ष की खबर।
नई दिल्ली
प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा प्रणाली में अनियमितताओं से प्रभावित लाखों छात्रों के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई को निकाले गए 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया है। प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने, लाठीचार्ज, मेट्रो सेवाएं निलंबित करने और इंटरनेट बंद करने की खबरों पर दुनिया भर के प्रमुख मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाले गए इस मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी झड़प हुई थी, जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने कहा- "गैर-जरूरी और अत्यधिक बल प्रयोग की हो निष्पक्ष जांच"
वैश्विक मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल का बयान:
"शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैर-जरूरी और अत्यधिक बल प्रयोग की खबरें सामने आई हैं। भारतीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान कथित गैर-कानूनी आचरण और बल प्रयोग के सभी आरोपों की तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।"
वहीं, ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) ने भी घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि हजारों प्रदर्शनकारी जब संसद की ओर बढ़ रहे थे, तब कई लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। संस्था ने जोर दिया कि अधिकारियों को बल प्रयोग के इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

विदेशी मीडिया में गूंजा छात्र आंदोलन: न्यूयॉर्क टाइम्स और गार्जियन की विशेष रिपोर्ट
दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए इस छात्र आंदोलन की गूंज अब विदेशी अखबारों के पन्नों तक पहुंच चुकी है। दुनिया के शीर्ष मीडिया संस्थानों ने इस घटनाक्रम को प्रमुखता से कवर किया है:
1. न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times): "खून बहा, लेकिन प्रदर्शनकारी डटे रहे"
अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सोमवार को संसद मार्च के दौरान लाठियां चलीं, खून बहा और आंसू गैस के गोले दागे गए, लेकिन अगले ही दिन हजारों छात्र फिर से जंतर-मंतर पर एकत्र हो गए।
अखबार के अनुसार:
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आंदोलनकारी संगठनों ने दावा किया है कि पुलिस कार्रवाई में लगभग 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं।
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दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि हिंसक झड़प और पथराव में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
2. द गार्जियन (The Guardian): "सिर्फ शिक्षा सुधार नहीं, सरकार के खिलाफ युवा आक्रोश"
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार 'द गार्जियन' ने लिखा कि सख्त पुलिसिया कार्रवाई भी इस छात्र आंदोलन को डिगा नहीं सकी। अखबार ने अपनी समीक्षा में लिखा कि यह आंदोलन अब महज परीक्षा या शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा अब सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना गुस्सा जताने सड़कों पर उतर रहे हैं।
गतिरोध बरकरार, पीछे हटने को तैयार नहीं छात्र
जंतर-मंतर पर पुलिस बल तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। CJP और छात्र संगठनों का साफ कहना है कि जब तक सरकार परीक्षा तंत्र में सुधार और जवाबदेही तय नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वही, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए थे।
