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CEO एस चोक्कलिंगम ने ECINet में 4 बड़े बदलावों की मांग की, EROs को अधिक अधिकार देने की सिफारिश

लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने की मांग; ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटे 2 करोड़ से ज्यादा नाम, 16 नवंबर को आएगी अंतिम मतदाता सूची।

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महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के नोटिस चरण के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को पत्र लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में चार प्रमुख बदलावों की सिफारिश की है। CEO की इन मांगों का मुख्य उद्देश्य चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (Logical Discrepancy) वाले मामलों में फैसला लेने के लिए ज्यादा प्रशासनिक अधिकार और स्वतंत्रता देना है।

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उल्लेखनीय है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू भी पहले केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर नियंत्रण के कारण EROs के सीमित होते अधिकारों पर चिंता जता चुके हैं।

क्या है 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' मामला?

SIR प्रक्रिया के दौरान ECINet सॉफ्टवेयर मतदाता के वर्तमान रिकॉर्ड का मिलान पिछली SIR सूची में दर्ज उसके माता-पिता या पूर्वजों के रिकॉर्ड से करता है। इस प्रक्रिया में यदि नाम की स्पेलिंग, उम्र या अन्य विवरण में असमानता होती है, तो सॉफ्टवेयर उसे 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के रूप में चिह्नित करता है।

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अधिकारियों के अनुसार, इस डिस्क्रेपेंसी का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि संबंधित व्यक्ति फर्जी मतदाता है; यह केवल डेटा में तकनीकी या लिपिकीय मेल न होने की स्थिति है।

EROs के लिए ज्यादा अधिकारों की मांग

कानून के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची तैयार करने, दावों व आपत्तियों का निस्तारण करने की वैधानिक जिम्मेदारी ERO (जो सामान्यतः SDM स्तर के अधिकारी होते हैं) की होती है।

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महाराष्ट्र CEO ने चुनाव आयोग से मांग की है कि:

  1. SIR नोटिस की प्रोसेसिंग के दौरान EROs को निर्णय लेने के अधिक विकल्प दिए जाएं।

  2. यदि मतदाता द्वारा जमा किए गए दस्तावेज संतोषजनक हैं, तो ERO को उस व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में बुलाने से छूट देने का अधिकार मिलना चाहिए।

इस मांग पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद EROs को उन मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने की अनुमति दे दी है, जिनके रिकॉर्ड में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी पाई गई थी और जिनके दस्तावेज सही पाए गए हैं।

ड्राफ्ट मतदाता सूची में 21.1% की कमी: 2 करोड़ से अधिक नाम हटे

31 अगस्त को प्रकाशित महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्य के कुल मतदाताओं में 21.1 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। CEO एस चोक्कलिंगम के अनुसार, SIR प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट सूची से 2 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इनमें से अधिकांश नाम ऐसे मतदाताओं के हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो स्थाई रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं।

राज्य की अंतिम और संशोधित मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी की जाएगी।