सावधान! फ्री में वेब सीरीज-फिल्में दिखाने वाले ऐप बन रहे ठगी का नया हथियार, वाराणसी में युवक के खाते से उड़े ₹1 लाख
'टयूबी ऐप' डाउनलोड करते ही मोबाइल हुआ हैक; साइबर सेल का खुलासा— हर 4-5 दिन में आ रहे ऐसे मामले, रहें सतर्क
वाराणसी (भदैनी मिरर): सोशल मीडिया और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स के इस दौर में अगर आप भी मुफ्त में फिल्में या वेब सीरीज देखने के लिए किसी अनधिकृत ऐप का सहारा ले रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। साइबर ठगों ने अब लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाने के लिए 'फ्री मनोरंजन ऐप' को अपना नया जरिया बना लिया है। वाराणसी के कैंट इलाके में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को मुफ्त में मनोरंजन की चाहत एक लाख रुपये की चपत दे गई।


विज्ञापन देखकर डाउनलोड किया ऐप, फिर जो हुआ...
कैंट निवासी अहमद नाम के युवक ने इंस्टाग्राम पर 'टयूबी ऐप' (TUBE App) का एक विज्ञापन देखा था। इस विज्ञापन में दावा किया गया था कि बिना किसी सब्सक्रिप्शन फीस के नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और हॉटस्टार जैसे महंगे प्लेटफॉर्म्स की फिल्में और वेब सीरीज इस ऐप पर बिल्कुल फ्री देखी जा सकती हैं। अहमद ने झांसे में आकर ऐप डाउनलोड कर लिया।

पहले दिन तो एक वेब सीरीज चली, लेकिन अगले दिन ऐप ने काम करना बंद कर दिया। अहमद ने ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल (Uninstall) भी कर दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ऐप हटाने के कुछ ही देर बाद उसका मोबाइल अचानक बंद हो गया और जब दो घंटे बाद चालू हुआ, तो यूपीआई (UPI) के जरिए उसके खाते से एक लाख रुपये पार हो चुके थे। पीड़ित की शिकायत पर कैंट पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप की तरह काम करते हैं ये फ्रॉड ऐप्स
साइबर सेल के प्रभारी मनोज तिवारी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वाराणसी में हर चौथे-पांचवें दिन फ्री मनोरंजन ऐप के जरिए मोबाइल हैक होने और ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।
साइबर थाने के एक्सपर्ट चंद्रशेखर यादव ने इसके पीछे की तकनीक समझाते हुए बताया:
"इन अनधिकृत ऐप्स के भीतर एक खास कोडिंग छिपी होती है। यह ऐप आपके मोबाइल में डाउनलोड होते ही बैकग्राउंड में 'एनी डेस्क' या 'टीम व्यूअर' जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप की तरह काम करने लगता है। जब तक यूजर ऐप पर फिल्में ढूंढ रहा होता है, तब तक ठग उसके मोबाइल का पूरा डेटा, फोटो, पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स खंगाल लेते हैं। तुरंत पैसे निकालने के बजाय, ठग एक-दो दिन बाद मोबाइल हैक कर ठगी करते हैं।"
सतर्कता ही एकमात्र बचाव: एसीपी साइबर
एसीपी (साइबर अपराध) विदुष सक्सेना ने जनता से अपील करते हुए कहा कि किसी भी अनधिकृत या फेक ऐप को डाउनलोड करने से बचें। इन ऐप्स में हानिकारक एपीके (APK) फाइलें छिपी होती हैं, जो आपके फोन का पूरा एक्सेस ठगों के हाथ में सौंप देती हैं। प्ले स्टोर या ऐप स्टोर के बाहर से किसी भी लिंक पर क्लिक करके ऐप इंस्टॉल न करें। आपकी सतर्कता ही साइबर अपराधियों से आपका बचाव कर सकती है।
