Budget 2026: टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए जरूरी हैं ये 5 बड़े सुधार, जानिए क्या हो सकती हैं घोषणाएं
ITR से लेकर NPS और विदेशी रेमिटेंस तक, बजट 2026 में टैक्स सिस्टम को आसान बनाने की उम्मीद
नई दिल्ली। हर केंद्रीय बजट में बड़े ऐलान होते हैं, लेकिन आम टैक्सपेयर्स के लिए असली राहत कागज़ी प्रक्रियाओं और नियमों की जटिलता कम होने से मिलती है। Budget 2026 से करदाताओं को बहुत ज्यादा नहीं, बल्कि व्यवहारिक और असरदार सुधारों की उम्मीद है—जिनसे टैक्स फाइलिंग आसान हो, लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा मिले और अनुपालन बोझ कम हो।



विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर बजट 2026 में नीचे बताए गए 5 अहम सुधार किए जाते हैं, तो टैक्स सिस्टम ज्यादा सरल, पारदर्शी और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बन सकता है।
1. एक ITR, एक टैक्स विकल्प
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच चुनाव को टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद बताया गया था, लेकिन Form 10-IE जैसी अतिरिक्त औपचारिकताओं ने इसे उलझा दिया है। कई लोग फॉर्म भरना भूल जाते हैं या गलती कर बैठते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

सुझाव:
टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प सीधे ITR फॉर्म में ही शामिल किया जाए।
एक रिटर्न, एक स्पष्ट विकल्प—कोई अलग फॉर्म नहीं।
2. विदेशी रेमिटेंस पर 20% TCS में राहत
Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत विदेशी रेमिटेंस पर **20% TCS** का प्रावधान टैक्स चोरी रोकने के लिए लाया गया था, लेकिन यह दर आम लोगों के लिए भारी साबित हो रही है—खासतौर पर परिवार की मदद या पढ़ाई जैसे जरूरी खर्चों में।

सुझाव:
- TCS को घटाकर 10% किया जाए
- या स्लैब सिस्टम लागू हो—₹50 लाख तक कम दर, उसके ऊपर ज्यादा दर
3. NPS निकासी पर टैक्स को लेकर स्पष्टता
हाल ही में NPS नियमों में बदलाव कर ₹8 लाख तक की पूरी निकासी और उससे ऊपर 80% निकासी की अनुमति दी गई है, जो एक सकारात्मक कदम है।
लेकिन अब सवाल यह है कि पहले जहां केवल 60% राशि टैक्स फ्री थी, अब अतिरिक्त 20% पर टैक्स लगेगा या नहीं?
बजट 2026 से उम्मीद:
इस अतिरिक्त निकासी को भी पूरी तरह टैक्स फ्री किया जाए, ताकि NPS एक भरोसेमंद रिटायरमेंट विकल्प बने।
4. नई टैक्स व्यवस्था में NPS को बराबरी का दर्जा
नई टैक्स व्यवस्था में कटौतियां बेहद सीमित हैं। फिलहाल केवल **Section 80CCD(2)** (एम्प्लॉयर का NPS योगदान) ही राहत देता है।
सुझाव:
- Section 80CCD(1b) की ₹50,000 अतिरिक्त छूट को नई टैक्स व्यवस्था में भी लागू किया जाए
- इसे बढ़ाकर ₹1 लाख किया जाए
इससे लंबी अवधि की बचत को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
5. जॉइंट टैक्स रिटर्न का प्रावधान
भारत में आज भी पति-पत्नी को टैक्स के मामले में अलग-अलग इकाई माना जाता है, जबकि अधिकांश घरों में ड्यूल इनकम फैमिली होती है।
सुझाव:
- विवाहित जोड़ों के लिए Joint Tax Return का विकल्प
- ज्यादा बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट
इससे टैक्स इक्विटी बढ़ेगी और परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम में इजाफा होगा।
बजट 2026 से बड़ी उम्मीद नहीं, सही सुधार चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि Budget 2026 में बड़े टैक्स धमाकों की नहीं, बल्कि सूक्ष्म लेकिन असरदार सुधारों की जरूरत है।
कम फॉर्म, साफ नियम, संतुलित टैक्स और बेहतर बचत प्रोत्साहन—यही टैक्सपेयर्स के लिए असली राहत होगी।
