नई दिल्ली में ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम का आगाज, 10 देशों के न्यायिक प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे CJI सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट कर रहा 3 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी, एआई, अंतरराष्ट्रीय विवाद और मध्यस्थता जैसे 4 मुख्य विषयों पर होगी चर्चा
नई दिल्ली (भदैनी मिरर न्यूज़): भारत की मेजबानी में राजधानी नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट परिसर में 4 से 6 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय भव्य 'ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम' (BRICS Chief Justices Forum) का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ब्रिक्स सदस्य देशों और वैश्विक साझेदार राष्ट्रों के शीर्ष न्यायिक नेताओं के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।


4 सितंबर को उद्घाटन सत्र के बाद CJI सूर्यकांत 10 प्रमुख देशों— रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बेलारूस, कजाखस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ सीधे संवाद करेंगे।
दिग्गज अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीशों की होगी मौजूदगी

द्विपक्षीय बैठकों के दौरान दुनिया के कई प्रमुख देशों के मुख्य न्यायाधीश और अध्यक्ष शामिल होंगे, जिनमें शामिल हैं:
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रूस: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इगोर क्रास्नोव
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चीन: सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के अध्यक्ष और चीफ जस्टिस झांग जून
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मिस्र: सुप्रीम कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट के चीफ जस्टिस बौलोस गहमी इस्कंदर बौलोस
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इंडोनेशिया: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सुनार्टो
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UAE: फेडरल सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष मोहम्मद हमद अल बादी अल धाहेरी
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इरान: चीफ जस्टिस अयातुल्ला गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई
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बेलारूस, कजाखस्तान, दक्षिण अफ्रीका व उज्बेकिस्तान के शीर्ष न्यायिक प्रतिनिधि
इस संवाद का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की न्यायपालिकाओं के बीच आपसी अनुभव साझा करना, संस्थागत सहयोग को मजबूत करना और साझा कानूनी चुनौतियों का समाधान निकालना है।


इन 4 प्रमुख विषयों पर होगी गहन चर्चा
तीन दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई) के साथ-साथ साझेदार देशों (बेलारूस, बोलीविया, कजाखस्तान, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान) के प्रतिनिधि 4 प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे:
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मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवाद: वैश्विक अर्थव्यवस्था के समन्वय में वाणिज्यिक विवादों को निपटाने के लिए मध्यस्थता को सशक्त माध्यम बनाना।
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फैसलों का सीमापार क्रियान्वयन (Cross-Border Execution): एक देश के न्यायिक फैसलों को दूसरे देश में लागू करने में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को दूर करना।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और न्यायपालिका: अदालती कामकाज में डिजिटल बदलाव, एआई (AI) का इस्तेमाल और न्याय व्यवस्था के भविष्य पर इसके प्रभाव।
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न्यायिक नेतृत्व और सतत विकास (Sustainable Development): पर्यावरण संरक्षण, जलवायु न्याय और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देने में अदालतों की भूमिका।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यह फोरम वैश्विक स्तर पर न्यायिक संवाद को नई दिशा देने और कानूनी चुनौतियों से मिलकर निपटने में मील का पत्थर साबित होगा।
