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किसानों के लिए बड़ी राहत! सरकार ने बदले नियम, अब 75 हजार रुपये तक का कर्ज होगा पूरी तरह माफ

सहकारी संस्थाओं से लोन लेने वाले लाखों किसानों को फायदा; सरकार ने बढ़ाया बजट, कर्ज चुका चुके किसानों को भी मिलेगा लाभ

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भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क, कृषि डेस्क: खेती में खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी के बढ़ते खर्च के बीच किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए सरकारों द्वारा लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में तमिलनाडु सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए अपनी फसल कर्ज माफी योजना (Crop Loan Waiver Scheme) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए संशोधनों के बाद अब सहकारी संस्थाओं से कर्ज लेने वाले किसानों को सरकार की ओर से व्यापक वित्तीय सहायता मिलेगी।

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75 हजार रुपये तक का पूरा कर्ज माफ

नई व्यवस्था के तहत, जिन किसानों ने 75 हजार रुपये तक का फसल कर्ज लिया है, उनका पूरा बकाया माफ कर दिया जाएगा। वहीं, जिन किसानों का कर्ज इस सीमा से अधिक है, उन्हें भी सरकार की तरफ से अधिकतम 75 हजार रुपये तक की सीधी राहत प्रदान की जाएगी।

सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस शानदार फैसले से कुल 13,24,881 किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें से 5,90,621 किसान ऐसे हैं, जिनका पूरा कर्ज (75 हजार तक) माफ होगा, जबकि 7,34,260 किसानों को 75 हजार रुपये की राहत राशि मिलेगी।

2,842 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मंजूर

योजना का दायरा बढ़ाने के लिए तमिलनाडु सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है। सहकारिता, खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, इस योजना के लिए 2,842.77 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मंजूर किया गया है। इसके साथ ही इस पूरी योजना पर अब कुल 9,062.83 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें से 6,220.05 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

कर्ज चुका चुके किसानों को भी मिलेगा फायदा

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसका लाभ उन किसानों को भी मिलेगा, जिन्होंने कर्ज माफी की घोषणा से पहले ही ईमानदारी दिखाते हुए अपना पूरा कर्ज चुका दिया था। ऐसे 10,810 किसानों को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है।

इसके अलावा, सरकार ने योजना के तहत कर्ज लेने की समयसीमा को भी बढ़ा दिया है। अब 31 मार्च 2026 तक लिए गए पात्र फसल कर्ज इस योजना के अंतर्गत मान्य होंगे (पहले यह डेडलाइन 28 फरवरी 2026 तक थी)। पुराने नियमों के मुकाबले अब अधिक से अधिक किसानों को कवर किए जाने से अन्नदाताओं में खुशी की लहर है।