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सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद झुका BCI: चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के छात्रों से मांगी माफी, वापस लिया फैसला

"यह मेरे लिए अहंकार या प्रतिष्ठा का विषय नहीं", सुप्रीम कोर्ट ने BCI को लगाई थी फटकार

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Manan Mishra
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Bhadaini Mirror Desk: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने हैदराबाद स्थित 'नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च' (NALSAR) यूनिवर्सिटी के वकालत के छात्रों से औपचारिक रूप से माफी मांगी है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी एक चिट्ठी में BCI प्रमुख ने छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने वाले अपने विवादित फैसले पर अफसोस जताया है।

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उल्लेखनीय है कि विवाद बढ़ने के बाद BCI ने पहले अपने आदेश में आंशिक संशोधन किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और बढ़ते जनाक्रोश के बाद इसे पूरी तरह वापस ले लिया गया।

"यह मेरे लिए अहंकार या प्रतिष्ठा का विषय नहीं": मनन मिश्रा

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों को लिखी चिट्ठी में कहा:

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"अगर इस पूरे विवाद, मेरी किसी बात या चिट्ठी से हमारे लॉ स्टूडेंट्स की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मुझे इसके लिए दिल से अफसोस है और मैं बिना किसी हिचकिचाहट के माफी मांगता हूं। छात्रों से अफसोस जताना मेरे लिए किसी अहंकार या प्रतिष्ठा की बात नहीं है, क्योंकि हमारे छात्रों की चिंताएं सबसे ज्यादा मायने रखती हैं।"

जानिए क्या था पूरा विवाद?

  • दीक्षांत समारोह में विरोध: विवाद की शुरुआत NALSAR यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से हुई, जहां स्नातक हो रहे लगभग 450 छात्रों ने मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की उपस्थिति का शांतिपूर्ण विरोध किया था।

  • छात्रों का तर्क: छात्रों का आरोप था कि पुलिस बर्बरता से जुड़ी याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से कथित तौर पर इनकार किया गया था।

  • BCI का कड़ा रुख: इसके जवाब में Bar Council of India ने एक विवादित आदेश जारी कर विरोध में शामिल छात्रों के वकील (Advocate) के रूप में एनरोलमेंट पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को लगाई थी फटकार

इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने BCI की कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जताई थी।

सीजेआई की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा था:

  • शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार: "अगर छात्र शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करा रहे हैं, तो BCI उन पर कार्रवाई करने वाला कौन होता है? शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है।"

  • संवाद का विषय: "यह मामला केवल मेरे और छात्रों के बीच का संवाद है, इसमें किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।"

सर्वोच्च अदालत द्वारा छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के बाद, अंततः बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को बैकफुट पर आते हुए छात्रों से माफी मांगनी पड़ी।

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