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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: अब फरार आरोपियों की खैर नहीं, कुर्की और 'इन एब्सेंटिया' ट्रायल के लिए जारी हुई गाइडलाइन

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी ने फरार अपराधियों के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई के लिए जारी किए सख्त निर्देश।

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और अपराधियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने फरार आरोपियों के खिलाफ सख्त और चरणबद्ध कार्रवाई के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई आरोपी जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया से बचता है, तो उसके खिलाफ संपत्ति कुर्की और उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा (In Absentia Trial) चलाने की प्रक्रिया अपनाई जाए।

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क्या है मामला?

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने आगरा के रवि उर्फ रविंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। रवि के खिलाफ साल 2020 में हत्या के प्रयास (धारा 307 IPC) का मामला दर्ज हुआ था। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद वह ट्रायल के दौरान 29 बार अदालत से गैरहाजिर रहा। निचली अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को रवि ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

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हाईकोर्ट की नई गाइडलाइन: चरणबद्ध एक्शन का खाका

अदालत ने गृह विभाग, पुलिस और अभियोजन को निर्देश दिया है कि फरार आरोपियों के मामले में निम्नलिखित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन हो:

  1. कड़ी कार्रवाई का क्रम: फरार आरोपियों के खिलाफ पहले समन/वारंट, फिर गैर-जमानती वारंट (NBW), उसके बाद फरारी की उद्घोषणा (धारा 82 CrPC) और अंत में संपत्ति कुर्की (धारा 83 CrPC) की कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए।

  2. जमानतदारों की जिम्मेदारी: यदि जमानत पर छूटा आरोपी फरार होता है, तो उसकी जमानत तुरंत जब्त की जाए और उसे जमानत देने वाले व्यक्तियों (Sureties) के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

  3. समयबद्ध ट्रायल: अदालतों को बिना उचित कारण के 'तारीख पर तारीख' देने से बचने का निर्देश दिया गया है। गवाहों की मौजूदगी में रोजाना सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

  4. अनुपस्थिति में ट्रायल: यदि आरोपी लगातार फरार है, तो उसके वकील या 'अमिकस क्यूरी' के जरिए ट्रायल जारी रखा जा सकता है। कानून की नजरों से छिपने वाले आरोपियों के लिए अलग से मुकदमा चलाने का भी प्रावधान होगा।

पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय

हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और कुर्की की कार्रवाई में देरी न की जाए। कोर्ट ने साफ किया कि यदि जांच लंबित है और आरोपी फरार है, तब भी निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए।

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अदालत के इस फैसले से उन अपराधियों में हड़कंप मचना तय है जो जमानत मिलने के बाद कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं होते और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं।