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Air India Plane Crash: उड़ान से 15 मिनट पहले विमान ने भेजे थे खराबी के 10 संदेश! हादसे के 1 साल बाद चौंकाने वाला दावा

टेकऑफ से पहले विमान ने भेजे थे 10 'अलर्ट कोड', इन कोड्स को सिर्फ 'बोइंग' ही कर सकता है डिकोड

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अहमदाबाद/नई दिल्ली: 12 जून 2025 का वह काला दिन कोई नहीं भूल सकता, जब गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान 'AI171' क्रैश हो गया था। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 241 लोगों (एक को छोड़कर) की दर्दनाक मौत हो गई थी। विमान एक मेडिकल कॉलेज परिसर में गिरा था, जिससे जमीन पर मौजूद कई लोग भी इसकी चपेट में आ गए थे।

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आज इस दर्दनाक हादसे को ठीक एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन "हादसा क्यों और कैसे हुआ?" जैसे बुनियादी सवालों के ठोस जवाब अब तक नहीं मिल पाए हैं। इसी बीच, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने नागरिक उड्डयन जगत में खलबली मचा दी है।

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टेकऑफ से पहले विमान ने भेजे थे 10 'अलर्ट कोड'

एफआईपी (FIP) के प्रमुख कैप्टन सीएस रंधावा ने क्रैश की बरसी पर अहमदाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि क्रैश होने वाले बोइंग 787 विमान ने उड़ान भरने से ठीक 15 मिनट पहले और उड़ान के दौरान कम से कम 10 इनक्रिप्टेड (कोड वर्ड में) हेल्थ मॉनिटरिंग मैसेज भेजे थे।

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कैप्टन रंधावा के मुताबिक, इन बेहद महत्वपूर्ण संदेशों को शुरुआती जांच रिपोर्ट से पूरी तरह गायब या नजरअंदाज कर दिया गया है।

इन कोड्स को सिर्फ 'बोइंग' ही कर सकता है डिकोड

पायलट एसोसिएशन के प्रमुख ने तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए बताया कि विमान का 'एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशन एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम' (ACARS) इंजन की गति, तेल और हाइड्रोलिक प्रेशर जैसे सैकड़ों मापदंडों पर ऑटोमैटिक संदेश भेजता है।

"ये संदेश पूरी तरह इनक्रिप्टेड (कोडेड) होते हैं। इन्हें खुद एयर इंडिया भी नहीं पढ़ सकता, सिर्फ विमान निर्माता कंपनी 'बोइंग' ही इसे डिकोड कर सकती है। सवाल यह है कि इस बेहद जरूरी डेटा को जांच एजेंसी (AAIB) के साथ साझा क्यों नहीं किया गया? हमने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि इन संदेशों को तुरंत डिकोड किया जाए।" - कैप्टन सीएस रंधावा, प्रमुख, FIP

दिल्ली से ही विमान में थी खराबी, पायलटों को फंसाने की कोशिश?

जांच के तरीके पर गहरी नाराजगी जताते हुए एफआईपी ने आरोप लगाया कि पूरी जांच को जानबूझकर 'पायलट की गलती' साबित करने पर केंद्रित किया गया, जबकि विमान में तकनीकी और इलेक्ट्रिकल खराबी (Electric Failure) की प्रबल संभावना थी।

कैप्टन रंधावा ने विमान के इतिहास को लेकर भी कई गंभीर दावे किए:

  • दिल्ली फ्लाइट में थी समस्या: अहमदाबाद से AI171 के रूप में उड़ान भरने से पहले, यही विमान दिल्ली से 'AI423' बनकर आया था। उस वक्त इसमें स्टेबलाइजर से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी दर्ज की गई थी। इसके बाद कुछ मोटर बदलकर इसे जल्दबाजी में उड़ान की हरी झंडी दे दी गई।

  • लाइट्स का टिमटिमाना: हादसे में चमत्कारिक रूप से बचे एकमात्र यात्री ने बताया था कि टेकऑफ और लैंडिंग के समय विमान की लाइट्स लगातार टिमटिमा (Flicker) रही थीं, जो कि साफ तौर पर एक गंभीर इलेक्ट्रिकल समस्या का लक्षण है।

जांच एजेंसी पर उठ रहे गंभीर सवाल

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर कड़े सवाल दागे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि:

  1. हादसे में जीवित बचे एकमात्र गवाह और यात्री से पूरे 10 महीने तक कोई पूछताछ क्यों नहीं की गई?

  2. जांच के नाम पर दिवंगत पायलट के 91 वर्षीय बुजुर्ग पिता को प्रताड़ित क्यों किया गया?

हादसे के एक साल बाद आए इस नए मोड़ ने यह साफ कर दिया है कि जब तक इन 10 सीक्रेट मैसेजेस की सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक 241 से ज्यादा जिंदगियां लील जाने वाले इस हादसे की जांच अधूरी ही रहेगी।