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महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय को मिलनेवाला 5 प्रतिशत आरक्षण समाप्त

कांग्रेस और एनसीपी सरकार में लिया गया था आरक्षण देने का निर्णय

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सरकार ने नया सरकारी प्रस्ताव जारी कर पूर्व आदेश को वापस ले लिया

मुम्बई। महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने सरकारी संकल्प (GR) जारी कर मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया है। विभाग ने यह आदेश मंगलवार की देर रात जारी किया। आपको बता दें कि मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को 5 प्रतिशत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) आरक्षण दिया जाता था। अब इसे समाप्त कर दिया गया।

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सरकार ने नया सरकारी प्रस्ताव जारी कर अपने उस पूर्व आदेश को वापस ले लिया है जिसमें मुस्लिम समुदाय को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी एवं अर्ध-सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। यह निर्णय न्यायालयों के निर्णयों और 2014 की नीति पर मौजूदा कानूनी स्थिति के अनुरूप लिया गया है। यह कोटा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी एवं अर्ध-सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए लागू किया गया था। महाराष्ट्र में मुस्लिम जनसंख्या 11.5 प्रतिशत है। न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर आयोग (2006) और न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा समिति (2004) दोनों ने आंकड़ों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दर्शाया है।

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2009 में, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने डॉ. महमूदुर रहमान समिति का गठन किया था। समिति ने शिक्षा और नौकरियों में मुस्लिम समुदाय के लिए 8 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। इसके बाद वर्ष 2014 में विधानसभा चुनावों से पहले तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने अध्यादेश जारी किया था। इस आदेश में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेश के साथ-साथ नौकरियों में मराठों को 16 और मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। इसने नवगठित विशेष पिछड़ा वर्ग-ए में शामिल करके 50 मुस्लिम समुदायों को 5प्रशित कोटा देने का भी निर्णय लिया था।

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