Movie prime
PMC_Hospital

US-Iran Peace Deal: डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने किए हस्ताक्षर, खत्म हुआ पश्चिम एशिया का महासंकट

111 दिन से जारी तनाव खत्म, वर्साय पैलेस में ट्रंप तो तेहरान से वर्चुअली जुड़े राष्ट्रपति पेजेशकियन; अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण के लिए देगा 300 अरब डॉलर।

Ad

 
Trump
WhatsApp Group Join Now

Ad

अंतरराष्ट्रीय डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia) में लंबे समय से जारी युद्ध और भारी तनाव के बीच आखिरकार विश्व शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक और बेहद बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोनों देशों के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते के मसौदे (MoU) पर आधिकारिक तौर पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते के साथ ही पिछले 111 दिनों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के खत्म होने पर अंतिम मुहर लग गई है।

Ad
Ad

वर्साय पैलेस से तेहरान तक डिजिटल मुहर

यह ऐतिहासिक घटनाक्रम फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित एक रात्रिभोज के दौरान सामने आया। जी7 देशों के सम्मेलन के सिलसिले में फ्रांस दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान में रहते हुए डिजिटल (ऑनलाइन) माध्यम से इस प्रक्रिया को पूरा किया। व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक वीडियो में ट्रंप को मैक्रों के साथ बैठकर इस समझौते पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है।

Ad

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से मोहम्मद बाकेर गालिबाफ पहले ही इस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर चुके थे। ओमान और कुछ अन्य मध्यस्थ देशों के प्रयासों से यह बातचीत सफल हो सकी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि अब असली परीक्षा इसके सही क्रियान्वयन की होगी।

Ad

📋 अमेरिका-ईरान समझौते की 14 अहम शर्तें

इस 14-सूत्रीय समझौते (MoU) के तहत दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म करने और आर्थिक-रणनीतिक संतुलन बनाने के लिए कई कड़े और महत्वपूर्ण नियम तय किए गए हैं, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं:

  1. सैन्य अभियानों पर तत्काल रोक: अमेरिका, ईरान और इस युद्ध में शामिल उनके सभी सहयोगी लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपने सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करेंगे।

  2. अनाक्रमण समझौता: दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार के नए युद्ध या सैन्य कार्रवाई की शुरुआत नहीं करेंगे और न ही बल प्रयोग की धमकी देंगे।

  3. संप्रभुता का सम्मान: अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान करेंगे और किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

  4. 60 दिनों की समय सीमा: दोनों देश अधिकतम 60 दिनों के भीतर इस मसौदे को एक पूर्ण और अंतिम समझौते में बदलने के लिए बातचीत पूरी करेंगे।

  5. नौसैनिक नाकाबंदी का अंत: एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ की गई नौसैनिक नाकाबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और अगले 30 दिनों में इसे पूरी तरह खत्म कर जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल करेगा।

  6. होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रास्ता: ईरान अगले 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित मार्ग देगा। बारूदी सुरंगों को साफ कर 30 दिनों में सामान्य व्यापारिक यातायात शुरू होगा।

  7. 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज: अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक बड़ी योजना तैयार करेगा।

  8. प्रतिबंधों की समाप्ति: अंतिम समझौता होने पर अमेरिका ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के प्राथमिक, द्वितीयक और एकतरफा प्रतिबंधों को हटाएगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और IAEA के प्रस्ताव भी शामिल हैं।

  9. परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उसके पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में नष्ट किया जाएगा।

  10. यथास्थिति (Status Quo) बरकरार: अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा।

  11. कच्चे तेल के निर्यात में छूट: अमेरिकी वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात, बैंकिंग, बीमा और परिवहन सेवाओं के लिए तत्काल आवश्यक कानूनी छूट जारी करेगा।

  12. फ्रीज की गई संपत्ति की वापसी: अमेरिका द्वारा रोकी गई या जब्त की गई ईरान की संपत्तियों और फंड को वापस लौटाया जाएगा, जिससे ईरान का केंद्रीय बैंक भुगतान कर सकेगा।

  13. कार्यकारी तंत्र की स्थापना: इस समझौते के सफल क्रियान्वयन और भविष्य की निगरानी के लिए दोनों देश मिलकर एक मजबूत कार्यकारी तंत्र (Executive Mechanism) बनाएंगे।

  14. संयुक्त राष्ट्र का समर्थन: इस पूरे अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से वैश्विक कानूनी समर्थन दिया जाएगा।

दुनिया और वैश्विक बाजार को बड़ी राहत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस कदम का स्वागत करते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है। इस समझौते का सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजार पर देखने को मिलेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बिना किसी शुल्क के तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों के गुजरने का रास्ता साफ होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी राहत मिलेगी।