सीजफायर से इन्कार: ट्रंप बोले—“ईरान को नेस्तनाबूद कर दूंगा”, होर्मुज संकट से वैश्विक तनाव बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा—युद्धविराम का सवाल ही नहीं; होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, भारत के 22 जहाज फंसे। ट्रंप ने नाटो, चीन-जापान और ब्रिटेन पर भी साधा निशाना।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वाइट हाउस से रवाना होते समय स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका किसी भी तरह के युद्धविराम (Ceasefire) के मूड में नहीं है। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर उन्होंने सख्त रुख जताते हुए कहा कि जब दुश्मन को “नेस्तनाबूद” किया जा रहा हो, तब युद्धविराम का सवाल ही नहीं उठता।


ट्रंप ने युद्धविराम की संभावना को किया खारिज
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा—
“हम बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मैं सीजफायर नहीं चाहता। जब आप दूसरे पक्ष को मिट्टी में मिला रहे हों, तब युद्धविराम जैसा कोई विकल्प नहीं होता।”
उनके बयान ने साफ संकेत दे दिए कि अमेरिका इस बार ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने से कम पर तैयार नहीं है। ट्रंप ने विश्वास जताया कि अमेरिकी कार्रवाई के पूरा होने के बाद इजरायल भी युद्ध खत्म करने को तैयार हो जाएगा।

उन्होंने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हमले की संभावनाओं पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए इसे “गोपनीय रणनीति” बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह ठप
युद्ध के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, अभी बंद है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। बंदी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

ट्रंप ने सहयोगी देशों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नाटो में इस संकट से निपटने का साहस नहीं है। उन्होंने चीन और जापान को भी इस जलमार्ग को खुलवाने में शामिल होने की “नसीहत” दी।
ब्रिटेन पर भी हमला
ब्रिटेन के समर्थन में सुस्ती पर उन्होंने मंच से ही चुटकी ली। ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में सहयोग देने में और तेजी दिखानी चाहिए थी। यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरानी ठिकानों पर हमले के लिए अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है।
ट्रंप का यह रुख दर्शाता है कि अमेरिका अब अपने सहयोगियों से बिना शर्त और तेज़ समर्थन की अपेक्षा कर रहा है।
भारत के 22 जहाज फंसे, रणनीतिक चिंता बढ़ी
फारस की खाड़ी में भारत के 22 जहाज अब भी फंसे हुए हैं। भारत बैक-चैनल कूटनीति के जरिए उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप की “युद्धविराम नहीं” नीति से संकेत मिल रहे हैं कि तनाव आगे लंबा खिंच सकता है, जिसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
भारत की चिंता यह भी है कि अमेरिका–ईरान टकराव में चीन की सक्रियता बढ़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में उसका दखल और मजबूत न हो जाए।
