मसूरी में तिब्बती समुदाय ने चीन के कब्जे की 67वीं वर्षगांठ पर किया जोरदार प्रदर्शन
कहा-दुनिया में मानवाधिकार संगठनों को अमानवीयता दिखती है लेकिन 67 साल से आजादी की लड़ाई लड़ रहे तिब्बतियों की आवाज नही सुन पाते
चीन में रह रहे तिब्बतियों पर लगातार अत्याचार हो रहा है
मसूरी। दस मार्च 1959 को चीन द्वारा तिब्बत्त को अपने नियंत्रण में लेने की 67वीं वर्षगांठ पर मसूरी में निवास करनेवाले तिब्बती समुदाय ने चीन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तिब्बत की आजादी के लिए विश्व समुदाय से समर्थन की मांग की। इस दौरान तिब्बती समुदाय के लोगों ने हैप्पीवैली से एलबीएस अकादमी गेट, जीरो प्वाइंट, ईंद्रभवन, गांधी चौक, मालरोड होते हुए मुख्य डाकघर कुलड़ी तक मार्च किया और फिर गांधी चौक पर प्रदर्शन समाप्त किया।


प्रदर्शन के दौरान तिब्बती यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कहा कि चीन में रह रहे तिब्बतियों पर लगातार अत्याचार हो रहा है। उनकी सांस्कृतिक धरोहरों को नष्ट किया जा रहा है और बच्चों को परिवार से अलग कर कालोनियल बोर्डिंग स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है। इससे उनकी भाषा और संस्कृति समाप्त हो रही है। यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। वर्षों से उनकी मांग पर विश्व समुदाय विचार नही कर पा रहा है। लोकतंत्र और मानव अधिकार की वकालत करने वालों को तिब्बतियों की सच्चाई नही दिख रही है।

गाजा, यूक्रेन, इरान और अन्य देशों पर हमले के दौरान इनको मानवता दिखाई देने लगती है, लेकिन उन पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ इनके सारे विचार खत्म हो जाते हैं। लेकिन तिब्बत से बाहर रह रहे तिब्बती अपनी संस्कृति, भाषा और पहचान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तिब्बती समुदाय ने भारत का आभार व्यक्त किया, जिसने उन्हें शरण दी और उनकी संस्कृति को संरक्षित करने में मदद की है। लेकिन उनकी मांगों पर विश्व समुदाय को विचार करना चाहिए। हम तब तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे, जबतक हमारी लड़ाई अंजाम तक नही पहुंच जाती।

