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Saudi-Pakistan-Turkey Pact: यमन के हूती हमलों से बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के घातक हमलों के बाद मक्का समझौते (Mecca Pact) की पहली परीक्षा; रियाद और तेहरान के बीच संतुलन बनाने में जुटा इस्लामाबाद।

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इस्लामाबाद/रियाद/वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): सऊदी अरब पर यमन के ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों द्वारा किए गए घातक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मध्य-पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुँच गया है। इस संकट के बीच हाल ही में गठित सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की त्रिपक्षीय रक्षा समझौते (मक्का समझौता) की पहली बड़ी परीक्षा शुरू हो गई है।

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इसी बीच, अमेरिकी मीडिया संस्थान 'न्यू यॉर्क टाइम्स' (NYT) की उस खबर ने तहलका मचा दिया जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने यमन में हूती ठिकानों पर बमबारी की है। पाकिस्तान सरकार ने इस खबर को पूरी तरह से "फर्जी और भ्रामक" करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।

पाकिस्तान की सफाई: 'हम केवल रक्षात्मक भूमिका में हैं'

पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) द्वारा यमन में हूती ठिकानों को निशाना बनाने की खबर पूरी तरह से मनगढ़ंत है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान जारी कर कहा कि यमन के थिएटर में पाकिस्तानी और तुर्की बलों की उपस्थिति जरूर है, लेकिन वे केवल सऊदी क्षेत्र की सुरक्षा (Defensive Role) के लिए हैं। सीधी सैन्य कार्रवाई केवल सऊदी अरब के सैनिक ही कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान किसी भी सूरत में यमन युद्ध में सीधे कूदकर अपने पड़ोसी देश ईरान को नाराज नहीं करना चाहता, जिसके साथ उसकी लंबी सीमा मिलती है। इस्लामाबाद, रियाद और तेहरान के बीच संतुलन बनाने की बेहद नाजुक डोर पर चल रहा है।

मक्का समझौते (Mecca Pact) की पहली बड़ी परीक्षा

अगस्त 2026 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ऐतिहासिक 'मक्का समझौते' के तहत तीनों देशों ने किसी भी एक सदस्य पर हमला होने पर एक-दूसरे की रक्षा करने की कसम खाई थी।

हाल ही में रियाद और आभा (Abha) हवाई अड्डों पर हुए हूती हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने के बाद इस रक्षा समझौते के तहत आपातकालीन बैठक बुलाई गई। हालांकि, पाकिस्तान और तुर्की दोनों ने ही यह साफ कर दिया है कि यह समझौता 'रक्षात्मक' (Defensive) है, न कि किसी देश पर आक्रमण (Offensive) करने के लिए।

तुर्की भी रक्षात्मक मदद देने पर कर रहा विचार

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने भी स्पष्ट किया है कि अंकारा, सऊदी अरब को वायु रक्षा (Air Defence), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और तकनीकी सहायता देने पर विचार कर रहा है ताकि सऊदी अरब की तेल संपत्तियों और हवाई क्षेत्र की रक्षा की जा सके। तुर्की भी यमन के भीतर सीधे सैन्य हमलों में शामिल होकर ईरान से रिश्ते बिगाड़ने के पक्ष में नहीं है।

फिलहाल, सऊदी अरब अपने हवाई क्षेत्र, शहरों और तेल अवसंरचनाओं को हूती मिसाइलों व ड्रोनों से बचाने के लिए अपने सहयोगियों से त्वरित मदद की उम्मीद कर रहा है, जबकि पाकिस्तान और तुर्की सैन्य संघर्ष में सीधे उतरने के बजाय केवल 'सुरक्षा कवच' प्रदान करने तक खुद को सीमित रखे हुए हैं।