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बांग्लादेश में बीनपी की भारी जीत के बाद राजनीतिक हिंसा और छात्र आंदोलन तेज

बीएनपी की छात्र इकाई जतियोताबादी छात्र दल ने कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के कैंपस और हॉस्टलों पर किया कब्जा 

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बीएनपी ने किया आरोपों को खारिज, कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों के बीच सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना

ढाका। बांग्लादेश में फरवरी 2026 के संसदीय चुनावों परिणामों के बाद राजनीतिक हिंसा और छात्र आंदोलन तेज हो गए हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की भारी जीत के बाद, उनकी छात्र इकाई जतियोताबादी छात्र दल ने कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के कैंपस और हॉस्टलों पर कब्जा कर लिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएनपी छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने अन्य राजनीतिक दलों, खासकर जमात-ए-इस्लामी और अन्य छोटे संगठनों के समर्थक छात्रों को हॉस्टलों से बाहर निकाला। ऐसी घटनाएं ढाका यूनिवर्सिटी, राजशाही यूनिवर्सिटी और जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में देखी गईं। कुछ छात्रों ने मीडिया को बताया कि हमारे हॉस्टल से रातों-रात निकाल दिया गया और कहा गया कि अब कैंपस में केवल बीएनपी समर्थक छात्र ही रहेंगे।

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उधर, बीएनपी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल छात्रों के बीच सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि पिछले शासन में छात्र लीग ने कैंपस पर आतंक मचाया था। अब हम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित कर रहे हैं। दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई इस्लामी छात्र शिबिर ने इस कदम को ’फासीवादी’ करार दिया और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। आपको बता दें कि बीएनपी की 212 सीटों के साथ जीत और जमात-ए-इस्लामी की 76 सीटों के बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने दूसरे राजनीतिक दलों, खासकर जमात-ए-इस्लामी और अन्य छोटे संगठनों के समर्थित छात्रों को हॉस्टलों से जबरन बाहर निकाल दिया है।

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इन विश्वविद्यालयों के कैंपस पर बीएनपी के छात्रों का कब्जा है। बीएनपी छात्र दल के सदस्यों ने हॉस्टल रूमों पर तालाबंदी कर दूसरे दलों के समर्थक छात्रों के सामान बाहर फेंक दिए और विरोध करने वालों पर हमले भी किए जाने की खबरें हैं। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि यह कब्जा चुनावी जीत के बाद सत्ता के नए संतुलन को कैंपस पर थोपने की कोशिश है। यह घटनाक्रम 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद की अस्थिरता को दर्शाता है, जब शेख हसीना का शासन गिरा था। तब छात्र लीग के सदस्यों को कैंपस से निकाला गया था। अब सत्ता परिवर्तन के साथ छात्र दल ने वही रणनीति अपनाई है। इन घटनाओं के बाद कई जगहों पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया। इसको लेकर झड़पें हुईं और हिंसा में दर्जनों घायल हुए हैं। छात्र राजनीति में यह बवाल शैक्षणिक सत्र को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ ही कई विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं स्थगित करने की मांग होने लगी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हिंसा पर चिंता जताई है। 
 

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