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जापान में कुदरत का कहर: 7.5 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, समुद्र में उठीं ऊंची लहरें; सुनामी का रेड अलर्ट जारी

3 मीटर ऊंची लहरों का खतरा: तटीय इलाके खाली करने के आदेश

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टोक्यो/नई दिल्ली: जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार को प्रकृति ने जबरदस्त तांडव मचाया है। रिक्टर स्केल पर 7.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के झटकों से पूरा देश दहल उठा। भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर में महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसके तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने भीषण सुनामी (Tsunami) की चेतावनी जारी कर दी है।

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3 मीटर ऊंची लहरों का खतरा: तटीय इलाके खाली करने के आदेश

भूकंप के झटके इतने तेज थे कि तटीय इलाकों में भगदड़ मच गई। प्रशासन ने इवाते, आओमोरी और होक्काइडो प्रांतों में 3 मीटर (करीब 10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरें आने की आशंका जताई है। हचिनोहे बंदरगाह से जहाजों को तुरंत गहरे समुद्र में भेज दिया गया है।

  • एडवाइजरी: लोगों से अपील की गई है कि वे समुद्र किनारे से हटकर तुरंत सुरक्षित ऊंचाइयों और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर चले जाएं।

  • समुद्र का स्तर: कई जगहों पर 80 सेंटीमीटर से अधिक ऊंची लहरें पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं।

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ठप हुई बुलेट ट्रेनें और बिजली सेवाएं

भूकंप के कारण जापान की लाइफलाइन मानी जाने वाली बुलेट ट्रेन (Shinkansen) सेवाओं पर ब्रेक लग गया है। टोक्यो और ओमोरी के बीच चलने वाली ट्रेनों को सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया है।

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  • रेलवे स्टाफ पटरियों और स्टेशनों की सघन जांच कर रहा है।

  • बिजली कंपनियां भी हाई अलर्ट पर हैं और ट्रांसमिशन लाइनों की जांच की जा रही है ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।

परमाणु संयंत्रों पर कड़ी नजर

जापान सरकार ने किसी भी बड़ी आपदा से निपटने के लिए एक इमरजेंसी टास्क फोर्स का गठन किया है। तोहोकू इलेक्ट्रिक पावर कंपनी फिलहाल बंद पड़े ओनागावा परमाणु संयंत्र का बारीकी से निरीक्षण कर रही है। हालांकि अभी तक किसी परमाणु इकाई से नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन भूकंप की तीव्रता को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है।

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प्रधानमंत्री की अपील: जापान के पीएम ने जनता से संयम बरतने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है।

आफ्टरशॉक्स की चेतावनी

भू-गर्भ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों में भारी आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) आ सकते हैं। जापान में भूकंप का एक पुराना और भयावह इतिहास रहा है, लेकिन मजबूत 'डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम' के कारण बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।