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अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में मारे गये ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई

बेटी, दामाद और पोते-पोतियों की भी चली गई जान, ईरानी मीडिया ने कहा-खामेनेई हजरत अली की तरह जिये और इमाम हुसैन की तरह शहीद हुए

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अयातुल्ला अली खामेनेई
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ईरान में जबर्दस्त रोष, अमेरिका को अंजाम भुगतने की दी गई चेतावनी

सुरक्षा परिषद के सलाहकार अली शमखानी और आईआरजीसी प्रमुख मोहम्मद पाकपूर से बंकर में मुलाकात के दौरान हुआ हमला

 नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के लोग अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए हैं। शनिवार की रात हवाई हमले में इनकी मौत हो गई। इनके मौत की अधिकारिक पुष्टि हो गई है। तेहरान में एक गुप्त बैठक के दौरान हुई इस स्ट्राइक ने पूरे मिडिल ईस्ट को हिला दिया है। 
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई मारे गए हैं। यह हमला उस वक्त हुआ जब 86 साल के खामेनेई एक गुप्त और सुरक्षित स्थान पर अपने दो सबसे वफादार करीबियों के साथ बैठक कर रहे थे। वे सुरक्षा परिषद के सलाहकार अली शमखानी और आईआरजीसी प्रमुख मोहम्मद पाकपूर से मुलाकात कर रहे थे। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियां लंबे समय से अली शमखानी का पीछा कर रही थीं और जैसे ही वे खामेनेई से मिलने पहुंचे, इस भीषण हमले को अंजाम दिया गया।

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अयातुल्ला अली खामेनेई

आपको बता दें कि इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन की सफलता के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे पहले खामेनेई को मार गिराने का एलान किया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खबर की पुष्टि कर दी। अमेरिकी मीडिया स्पेक्ट्रम इंडेक्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को सार्वजनिक घोषणा करने से पहले खामेनेई का शव दिखाया गया था। इस पूरे ऑपरेशन को तेहरान के भीतर एक सुरक्षित बंकर नुमा जगह पर बहुत ही गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। इस हमले ने पूरे ईरान प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले जून 2025 में भी अली शमखानी पर हमला हुआ था। लेकिन तब वह बाल-बाल बच गए थे। इस बार शमखानी की गतिविधियों ने ही अमेरिका और इजरायल को खामेनेई के ठिकाने तक पहुंचा दिया। अब खामेनेई के मारे जाने के बाद दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं होने लगी है। कहीं विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं तो कहीं खामेनेई के विरोधी जश्न मना रहे हैं।

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उधर, ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनकी तुलना ऐतिहासिक कर्बला के शहीद इमाम हुसैन से की है। मीडिया में प्रकाशित लेखों में लिखा गया है कि खामेनेई हजरत अली की तरह जिये और इमाम हुसैन की तरह शहीद हुए। उन्होंने जीवन भर अमेरिका के सामने झुकने से इनकार किया और अंत में रमजान के पवित्र महीने में दुश्मनों के हाथों मारे गए। ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि इस हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनकी बेटी, दामाद और पोते-पोतियों की भी मौत हो गई जान चली गई है। ईरान की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वे इस शहादत का बदला जरूर लेंगे और अमेरिका को इसका अंजाम भुगतना होगा।

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