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Iran-Israel War: 2 हफ्ते का सीजफायर, ट्रंप ने रोके हमले; ईरान बोला- ‘जंग खत्म नहीं’

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश, यूरेनियम कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने पर अड़ा तेहरान

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इंटरनेशनल डेस्क: Iran और Israel के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच फिलहाल तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। Donald Trump ने ईरान पर संभावित हमलों को दो सप्ताह के लिए टाल दिया है, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच अस्थायी सीजफायर लागू हो गया है।

हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि यह युद्ध का अंत नहीं है और उसकी सैन्य तैयारियां अभी भी जारी हैं।

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2 हफ्ते का सीजफायर, लेकिन अनिश्चित भविष्य

ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने सेना को फायरिंग रोकने का निर्देश दिया है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि “यह युद्ध का अंत नहीं है।”

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बयान जारी कर कहा कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई भी कार्रवाई होती है, तो उसका “पूरी ताकत से जवाब” दिया जाएगा।

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ट्रंप ने क्यों रोके हमले?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख जनरल Asim Munir के साथ बातचीत के बाद उन्होंने हमले टालने का फैसला लिया।

शुरुआत में ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कड़ी चेतावनी दी थी, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने तनाव कम करने का रास्ता चुना।

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ईरान की शर्तें: 10-पॉइंट प्लान

सीजफायर के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं—

  • यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) कार्यक्रम को मान्यता
  • सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना
  • क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
  • युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई
  • विदेशी खातों में जमा संपत्तियों की रिहाई

ईरान ने साफ किया है कि इन शर्तों के स्वीकार होने के बाद ही युद्ध समाप्त माना जाएगा।

सीजफायर पर भी विवाद

जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि सीजफायर “हर जगह” लागू है, वहीं Israel ने स्पष्ट किया कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता।

इजरायल के अनुसार, हिज़्बुल्लाह के हमलों के चलते लेबनान अभी भी संघर्ष का हिस्सा बना हुआ है।

आगे क्या?

ईरान ने पुष्टि की है कि आगे की वार्ता Islamabad में 10 अप्रैल से शुरू होगी, जो दो सप्ताह तक चल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर अस्थायी राहत जरूर दे सकता है, लेकिन जब तक दोनों पक्षों के बीच मूल मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक क्षेत्र में तनाव बना रहेगा।

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