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Iran Power Struggle: सेना का बढ़ा दखल, राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian साइडलाइन! IRGC ने संभाली कमान

रिपोर्ट में दावा—ईरान में अहम फैसलों पर IRGC का कब्जा, राष्ट्रपति के अधिकार सीमित; खुफिया मंत्री की नियुक्ति भी रोकी गई

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तेहरान। ईरान की राजनीति में इन दिनों बड़ा सत्ता संघर्ष देखने को मिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सरकारी कामकाज के अहम हिस्सों पर नियंत्रण बढ़ा लिया है, जिससे राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian की भूमिका सीमित होती नजर आ रही है।

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सेना का बढ़ता प्रभाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC अब प्रमुख सरकारी फैसलों में सीधे हस्तक्षेप कर रहा है। इससे नागरिक सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति की कई अहम नियुक्तियों और फैसलों को रोका जा रहा है।

खुफिया मंत्री की नियुक्ति पर रोक

पिछले सप्ताह राष्ट्रपति पेजेशकियन ने नए खुफिया मंत्री की नियुक्ति की कोशिश की, लेकिन IRGC के शीर्ष कमांडर Ahmad Vahidi के हस्तक्षेप के बाद यह प्रक्रिया रुक गई।

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सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित सभी नाम—जिनमें होसैन देहगान भी शामिल थे—को खारिज कर दिया गया। सेना का मानना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में संवेदनशील पदों पर नियुक्ति का अधिकार उसके पास होना चाहिए।

राजनीतिक गतिरोध की स्थिति

इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति पेजेशकियन की सरकार लगभग “राजनीतिक गतिरोध” की स्थिति में पहुंच गई है। सरकार के कई फैसले लंबित हैं और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

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सुप्रीम लीडर को लेकर भी सस्पेंस

ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei की स्थिति और सक्रियता को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। हाल के दिनों में उनकी सार्वजनिक उपस्थिति न होने से सत्ता संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ईरान की व्यवस्था में आमतौर पर राष्ट्रपति खुफिया मंत्री की नियुक्ति सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बाद ही करते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

क्या बदल रहा है ईरान का पावर स्ट्रक्चर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती है तो ईरान में सत्ता का संतुलन पूरी तरह सैन्य नेतृत्व की ओर झुक सकता है। इससे देश की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर असर पड़ सकता है।

ईरान में बढ़ते इस सत्ता संघर्ष पर दुनिया की नजर टिकी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या नागरिक सरकार अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगी या फिर सेना का प्रभाव और बढ़ेगा।

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