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Iran War Claim: अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग में रूस और चीन का मिल रहा सैन्य सहयोग, ईरान का बड़ा दावा

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले— चीन और रूस हमारे ‘रणनीतिक साझेदार’; युद्ध खत्म करने के लिए हमलों की गारंटी और मुआवजे की मांग

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा दावा किया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जारी संघर्ष में रूस और चीन ईरान को सैन्य सहयोग दे रहे हैं

उन्होंने दोनों देशों को ईरान का ‘रणनीतिक साझेदार’ बताते हुए कहा कि तेहरान को इस संघर्ष के दौरान राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य स्तर पर सहयोग मिल रहा है।

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इंटरव्यू में किया खुलासा

एक इंटरव्यू के दौरान अराघची ने कहा कि चीन और रूस के साथ ईरान के संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं।

उन्होंने कहा, “चीन और रूस हमारे रणनीतिक साझेदार हैं और वे इस संघर्ष में हमारा सहयोग कर रहे हैं। इसमें सैन्य सहयोग भी शामिल है। हालांकि सुरक्षा कारणों से इससे जुड़ी अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।”

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ट्रंप ने पहले जताया था शक

इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया था कि रूस इस युद्ध में ईरान की कुछ हद तक मदद कर सकता है।

ट्रंप ने कहा था कि संभव है रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ईरान को सीमित स्तर पर सहायता दे रहे हों।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी उपलब्ध करा सकता है।

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बातचीत से किया इनकार

ईरानी विदेश मंत्री ने मौजूदा हालात में युद्धविराम या बातचीत की संभावना से भी इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि भविष्य में ईरान पर इस तरह के हमले दोबारा नहीं होंगे। इसके साथ ही ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई है।

संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव

अराघची ने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। यह समिति पश्चिम एशिया में हुए हमलों और सैन्य कार्रवाई की जांच करेगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और किसके द्वारा।

खाड़ी देशों पर हमले के आरोपों का खंडन

ईरान ने इस बात से भी इनकार किया कि उसने किसी पड़ोसी देश के नागरिक इलाकों को निशाना बनाया है। ईरानी विदेश मंत्री का कहना है कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई केवल क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों तक सीमित रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अरब देशों के नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे इजरायल का हाथ हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान और अरब देशों के संबंधों में तनाव पैदा करना है।

ड्रोन को लेकर भी लगाया आरोप

अराघची ने एक और सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के “शाहिद” ड्रोन की तर्ज पर ‘लुकास’ नाम का नया ड्रोन विकसित किया है। उनके मुताबिक इस ड्रोन का इस्तेमाल अरब देशों में कुछ ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है।

ऊर्जा ठिकानों पर हमले की दी चेतावनी

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल या ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया, तो तेहरान इसका कड़ा जवाब देगा। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों और उनके ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

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