इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद खुले 5 एयरपोर्ट, फंसे 340,000 यात्रियों ने ली राहत की सांस
माउंट Anak Krakatau में खतरनाक विस्फोट के बाद दो दिनों तक बंद रहे जकार्ता समेत कई मुख्य हवाई अड्डे, लगभग 3,000 उड़ानें हुईं थीं प्रभावित।
इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटुआ (Mount Anak Krakatau) में हुए भीषण ज्वालामुखी विस्फोट के बाद बंद किए गए पांचों एयरपोर्ट्स को मंगलवार आधी रात के बाद दोबारा खोल दिया गया है। सप्ताहांत में हुए इस प्राकृतिक प्रकोप के कारण सुरक्षा कारणों से उड़ानों का संचालन दो दिनों के लिए पूरी तरह स्थगित करना पड़ा था।

शुक्रवार देर रात शुरू हुए इस विस्फोट से लावा के फव्वारे निकले और राजधानी जकार्ता तथा लैंपंग प्रांत तक ज्वालामुखी की राख फैल गई। सप्ताहांत भर यह इलाका भूकम्पीय रूप से सक्रिय बना रहा। जकार्ता का सोकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Soekarno-Hatta International Airport) सबसे पहले रविवार सुबह प्रभावित हुआ था, जिसने मंगलवार को भारतीय समयानुसार रात 00:30 बजे अपनी सेवाएं दोबारा शुरू कीं।

3 लाख से अधिक यात्री हुए थे फंसे
लंबी एयरपोर्ट बंदी के कारण लगभग 3,000 उड़ानें बाधित हुईं और 340,000 से अधिक यात्री देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों में फंस गए। सोमवार को जकार्ता के सोकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रस्थान हॉलों (departure halls) में यात्रियों की लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग अपने टिकट के रिफंड और उड़ानों के अपडेट के लिए परेशान नजर आए।

पूर्वी जावा के मलंग शहर से रविवार को जकार्ता लौटने वाली एक यात्री फिन्ना ने एयरपोर्ट की अफरा-तफरी का जिक्र करते हुए बताया कि लगातार उड़ानों के पुनर्निर्धारित (reschedule) होने के कारण वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी, और यात्रियों को यह समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या होगा।
दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों का देश
इंडोनेशिया में हुई इस हालिया घटना ने एक बार फिर इस दक्षिण पूर्व एशियाई देश के भौगोलिक जोखिमों को उजागर कर दिया है। इंडोनेशिया में 100 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं, जो दुनिया के किसी भी देश में सबसे अधिक हैं, और यह क्षेत्र लगातार ऐसे प्राकृतिक खतरों की चपेट में रहता है।
