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UN में भारत की दो-टूक: सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को भुगतने होंगे नतीजे, कश्मीर पर भी दिखाया आईना

भारत का स्पष्ट रुख: कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा

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Bhadaini Mirror Desk: संयुक्त राष्ट्र (UN) के वैश्विक मंच से भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और कश्मीर राग अलापने पर पड़ोसी देश को सख्त लहजे में आईना दिखाया है. भारत ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वह सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से कार्रवाई करेगा और अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा. भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसे प्रायोजित करने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत को रक्षा का पूरा अधिकार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में यह तीखी बहस उस समय देखने को मिली जब पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों पर चल रही चर्चा के दौरान भारत विरोधी बयानबाजी शुरू कर दी.

पाकिस्तान के इस दुष्प्रचार पर तीखा पलटवार करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को कहा:

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"भारत को सीमा पार से प्रायोजित होने वाले आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और अपनी संप्रभुता व नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है."

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करना उसके अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए जाने वाले खोखले बयानों को उजागर करता है. साल 1947 में अस्तित्व में आने के बाद से ही आतंकवाद, धार्मिक उग्रवाद और भारत के खिलाफ जहर उगलना पाकिस्तान की आदत बन चुकी है.

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कश्मीर पर पाक के झूठे दावों की निकाली हवा

भारतीय प्रतिनिधि के कड़े रुख से पहले, पाकिस्तानी राजनयिक आसिम इफ्तिखार अहमद ने कश्मीर मुद्दे को लेकर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों का हवाला देते हुए बेशर्मी से भारत पर दोषारोपण करने की कोशिश की थी. अहमद ने दावा किया था कि कश्मीर विवाद पिछले आठ दशकों से अनसुलझा है और कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल रहा है.

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भारत का स्पष्ट रुख: कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा

पाकिस्तानी दावों को सिरे से खारिज करते हुए पी. हरीश ने भारत का रुख पूरी दुनिया के सामने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में रखा:

  • अपरिवर्तनीय विलय: जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय पूरी तरह से कानूनी, पूर्ण और अपरिवर्तनीय (जिस बदला न जा सके) है. कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है.

  • पाकिस्तान ने किया संप्रभुता का उल्लंघन: भारत ने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कई युद्ध छेड़कर और लगातार आतंकवाद को पनाह देकर हमेशा अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं.

  • प्रस्ताव 47 का उल्लंघन: भारतीय प्रतिनिधि ने इतिहास का पन्ना पलटते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद का 21 अप्रैल 1948 का 'प्रस्ताव 47' पाकिस्तान को साफ तौर पर कश्मीर से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश देता है, लेकिन पाकिस्तान ने आज तक इस मांग का पालन नहीं किया.

पाक के कश्मीर 'अटैचमेंट' को भारत ने किया खारिज

भारत ने वैश्विक मंच पर यह साफ कर दिया कि वह कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के इस पुराने और बेबुनियाद जुनून (Obsession) को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता है. भारत ने वैश्विक समुदाय के सामने यह बात मजबूती से रखी कि यदि क्षेत्र में शांति चाहिए, तो पाकिस्तान को हर प्रकार के आतंकवाद को वित्तीय और जमीनी समर्थन देना तुरंत बंद करना होगा.