ईरान से आया कॉल, S. Jaishankar ने की अहम बातचीत; Donald Trump की धमकी से बढ़ा तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति, कतर और यूएई से भी हुई चर्चा; ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar को रविवार को ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का फोन आया, जिसमें मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत में पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम पर विचार-विमर्श हुआ, हालांकि उन्होंने बातचीत का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।


कतर और यूएई से भी बातचीत
ईरान के अलावा जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani तथा संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री Abdullah bin Zayed Al Nahyan से भी फोन पर बातचीत की।
इन बातचीतों में खास तौर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभाव, खासकर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई है।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से ईरान को दी गई सख्त चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 48 घंटे के भीतर नौवहन के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान के महत्वपूर्ण ढांचे जैसे बिजली संयंत्र और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है।

इस चेतावनी के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक ऊर्जा का लाइफलाइन
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है।
ईरान द्वारा इस मार्ग को आंशिक रूप से बाधित किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। हालांकि, ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।
भारत के लिए क्यों अहम है पश्चिम एशिया
पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव भारत की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।
भारत सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है कि संघर्ष जल्द समाप्त हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऊर्जा आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे।
कूटनीति पर जोर
भारत ने पिछले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ाते हुए सभी प्रमुख देशों के साथ संवाद कायम रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत संतुलित नीति अपनाते हुए अपने ऊर्जा हितों और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों को साधने की कोशिश कर रहा है।
