Movie prime
PMC_Hospital

सिंधु जल संधि पर भारत के कड़े रुख से बौखलाया पाकिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दी 'जल युद्ध' की गीदड़भभकी

ख्वाजा आसिफ ने कहा- "मामला शांति से नहीं सुलझा तो पानी को लेकर युद्ध भी हो सकता है

Ad

 
Pak
WhatsApp Group Join Now

Ad

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने दशकों पुरानी 'सिंधु जल संधि' पर रोक लगा दी थी

हमेशा कश्मीर का रोना रोने वाला पाकिस्तान अब वैश्विक मंचों पर पानी का मुद्दा उठाने को मजबूर

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: आतंकवाद को शह देने वाले पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय बदहाली के दौर से गुजर रही है, लेकिन उसकी गीदड़भभकियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ 'जल युद्ध' (Water War) छेड़ने की खोखली धमकी दी है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की यह बौखलाहट सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर भारत के सख्त और ऐतिहासिक फैसले के बाद सामने आई है।

Ad
Ad

दरअसल, बीते साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि के तहत सहयोग पर रोक लगा दी थी। इसी फैसले से तिलमिलाए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को इस्लामाबाद में एक सेमिनार के दौरान कहा, "अगर यह मामला शांतिपूर्ण ढंग से हल नहीं हुआ, तो अल्लाह न करे, दोनों देशों के बीच पानी को लेकर युद्ध भी हो सकता है।"

Ad

भारत पर लगाया अर्थव्यवस्था बर्बाद करने का आरोप

इस्लामाबाद में आयोजित इस सेमिनार का मुख्य मकसद भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक झूठा नैरेटिव सेट करना था। मंच से बोलते हुए ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भारत जानबूझकर पानी को विवाद का मुद्दा बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत, पाकिस्तान की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को तबाह करने की साजिश रच रहा है।

आसिफ ने तर्क दिया कि साल 1960 में हुई यह संधि दोनों देशों के बीच कई युद्धों के बावजूद बिना किसी रुकावट के चलती रही है, लेकिन अब भारत ने अपना रुख बदल लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह बयानबाजी पानी के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की एक हताश कोशिश मात्र है।

Ad

कश्मीर छोड़ अब पानी का रोना रो रहा पाकिस्तान

बीते कई दशकों से पाकिस्तान की कूटनीति सिर्फ कश्मीर राग अलापने तक सीमित थी। लेकिन भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि पर लिए गए कड़े फैसले ने इस्लामाबाद को घुटनों पर ला दिया है। अब कश्मीर से ध्यान भटककर पाकिस्तान की वैश्विक बातचीत का पूरा केंद्र बिंदु पानी का संकट बन गया है।

क्यों भारत ने पलटी अपनी नीति? जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस कायराना हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने अंजाम दिया था। इस खूनखराबे के बाद भारत ने अपनी दशकों पुरानी नरम नीति को ताक पर रख दिया और साफ संदेश दिया कि 'आतंक और बातचीत' या 'आतंक और जल सहयोग' एक साथ नहीं चल सकते। इसके बाद भारत ने संधि पर रोक लगा दी थी।

क्या है सिंधु जल संधि?

साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर 'सिंधु जल समझौता' हुआ था। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का पानी दोनों देशों में बंटता है। भारत इस संधि का हमेशा पूरी ईमानदारी से पालन करता आया है, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिए जाने के बाद भारत ने अब इस संधि को लेकर अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है, जिससे पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है।