पाकिस्तान के 'तानाशाह' बने असीम मुनीर: बिना तख्तापलट तीनों सेनाओं के बने सुपर बॉस
संसदीय संशोधनों के जरिए जनरल असीम मुनीर को मिलीं असीमित शक्तियां; पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बनकर इतिहास के सबसे ताकतवर सैन्य प्रमुख बने।
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश के इतिहास के सबसे ताकतवर सैन्य जनरल बन गए हैं। हालिया सैन्य कमांड ढांचे में हुए बड़े बदलावों ने उन्हें थल, नभ और जल तीनों सेनाओं का 'सुपर बॉस' बना दिया है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान में हर बार तख्तापलट कर सत्ता हासिल करने वाली सेना ने इस बार सड़कों पर टैंक उतारे बिना संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए मुनीर को यह असीमित ताकत सौंपी है।


संसद से पास हुए नए डिफेंस एक्ट ने दी 'सुपर पावर'
पाकिस्तान की संसद ने डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026 और नेशनल कमांड अथॉरिटी (संशोधन) एक्ट 2026 को मंजूरी दी, जिस पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हस्ताक्षर के बाद नया कानून लागू हो गया है। यह संशोधन 27वें संविधान संशोधन का हिस्सा है, जिसके तहत 'चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी' (CJCSC) के पुराने पद को खत्म कर 'चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज' (CDF) का नया और बेहद शक्तिशाली पद सृजित किया गया है। मुनीर को देश का पहला CDF नियुक्त किया गया है।

2030 तक पद पर रहेंगे मुनीर, प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार भी
इस नए कानून के तहत असीम मुनीर अब आर्मी चीफ के साथ-साथ CDF का पद भी संभाल रहे हैं। वह रक्षा बल मुख्यालय के प्रमुख के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों पर प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे। नए 5 साल के कार्यकाल के कारण अब मुनीर नवंबर 2030 तक पद पर बने रहेंगे, जबकि पहले उन्हें 2027 में रिटायर होना था। इसके साथ ही, नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर पद पर 4-स्टार जनरल लेफ्टिनेंट जनरल आमिर रजा को तैनात किया गया है।


'हाइब्रिड शासन' और आपराधिक मामलों से जीवनभर की छूट
राजनीतिक विश्लेषकों और आलोचकों ने 27वें संविधान संशोधन को पाकिस्तान का 'संवैधानिक तख्तापलट' करार दिया है। इस बदलाव से न सिर्फ सेना का राजनीतिक व्यवस्था पर पूर्ण दबदबा कायम हो गया है, बल्कि शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जीवनभर के लिए आपराधिक मुकदमों से कानूनी छूट भी मिल गई है। इससे पाकिस्तान में एक ऐसे 'हाइब्रिड शासन' की नींव मजबूत हो गई है, जहां नागरिक सरकार केवल नाममात्र की रहेगी और वास्तविक सत्ता जनरल मुनीर के हाथों में होगी।
