Asia Economic Crisis: क्या फिर आ रहा है 1997 जैसा एशियाई वित्तीय संकट? HSBC के दिग्गज अर्थशास्त्री ने AI को बताया बड़ा खतरा
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और येन की गिरावट से 1997 जैसी आहट; इस बार बैंकिंग सिस्टम नहीं, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में कटौती बनेगी विलेन
भदैनी मिरर (बिजनेस डेस्क)
एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के भविष्य को लेकर वैश्विक वित्तीय गलियारों में एक बार फिर गहरी चिंताएं जताने लगी हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yield) में तेजी, जापानी येन में ऐतिहासिक गिरावट और टेक्नोलॉजी सेक्टर में AI को लेकर बढ़ता अति-उत्साह 1997 के 'एशियाई वित्तीय संकट' (1997 Asian Financial Crisis) से पहले की परिस्थितियों की याद दिला रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग दिग्गज एचएसबीसी (HSBC) के चीफ इकोनॉमिस्ट फ्रेडरिक न्यूमन के अनुसार, आज एशिया की आर्थिक परिस्थितियां 1990 के दशक की तरह कमजोर तो नहीं हैं, लेकिन संकट की आहट बिल्कुल वैसी ही है। हालांकि, इस बार सबसे बड़ा खतरा बैंकिंग प्रणाली या विदेशी कर्ज नहीं, बल्कि अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले भारी खर्च में संभावित कटौती है।

1997 और 2026: आंकड़ों में डराने वाली समानताएं
फ्रेडरिक न्यूमन ने अपने हालिया नोट में 1997 के संकट और मौजूदा दौर के बीच कई भयावह समानताओं को रेखांकित किया है:
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अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल: 1990 के दशक में अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड अक्टूबर 1993 में 5% से बढ़कर नवंबर 1994 में 8% तक पहुंच गई थी। ठीक उसी तरह, हाल के महीनों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड निचले स्तर (0.5%) से तेजी से बढ़कर 4.79% के करीब पहुंच चुकी है।
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जापानी येन में बड़ी गिरावट: अप्रैल 1995 से 1997 के बीच येन डॉलर के मुकाबले 55% कमजोर होकर 80 से 130 प्रति डॉलर पर आ गया था। वर्तमान में भी येन में भारी गिरावट देखी गई, जब यह 103 के स्तर से गिरकर 163 प्रति डॉलर तक पहुंच गया और अमेरिका-जापान को मिलकर हस्तक्षेप करना पड़ा।
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टेक बूम (Tech Hype): 1990 के दशक में जहां इंटरनेट क्रांति को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह था, वहीं आज बाजार में 'एआई' (AI) को लेकर वैसा ही उन्माद है।
बैंकिंग नहीं, AI इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों बन रहा है नया विलेन?
1997 में थाईलैंड, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देश कमजोर बैंकिंग सिस्टम और विदेशी पूंजी के अचानक बाहर निकलने (Capital Outflow) के कारण डूबे थे। लेकिन न्यूमन का मानना है कि इस बार एशिया वित्तीय कमजोरी के बजाय मांग (Demand) की कमी का सामना कर रहा है।

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अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा का रोल: दक्षिण कोरिया, ताइवान, जापान, सिंगापुर और भारत जैसे एशियाई देश सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स और एआई हार्डवेयर के बड़े निर्यातक हैं। अमेरिकी टेक दिग्गज (Amazon, Microsoft, Alphabet, Meta) डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं।
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कर्ज की लागत में बढ़ोतरी: यदि अमेरिकी यील्ड और कर्ज की दरें ऊंची बनी रहीं, तो ये टेक कंपनियां अपने एआई बजट में कटौती करेंगी। इसका सीधा असर एशियाई टेक कंपनियों के 'ऑर्डर बुक' पर पड़ेगा।
भारत के लिए क्या हैं खतरे के संकेत?
भारत वर्तमान समय में वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और एआई इकोसिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। यदि अमेरिका में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च घटता है, तो भारत के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स, आईटी सर्विसेज और टेक एक्सपोर्ट को सीधा झटका लग सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस बार संकट का रास्ता करेंसी मार्केट से नहीं, बल्कि टेक सेक्टर की मांग में आने वाली अचानक मंदी से होकर गुजरेगा, जिससे एशियाई देशों की आर्थिक विकास दर सुस्त पड़ सकती है।
