Ali Khamenei Funeral: ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम विदाई शुरू, ताबूत देख भावुक हुए देश के बड़े नेता
Ali Khamenei Funeral: अली खामेनेई की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, 'या हुसैन' लिखे लाल झंडे में लिपटा ताबूत देख रो पड़े नेता
तेहरान (भदैनी मिरर डेस्क): ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए कई दिनों तक चलने वाले राजकीय शोक समारोह की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच देश-विदेश के वरिष्ठ नेता दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इस दौरान ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पूर्व सर्वोच्च नेता के ताबूत को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए और बेहद भावुक नजर आए।


ज्ञात हो कि इस वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के हमलों में खामेनेई की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद अब उनके अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों को आयोजित किया जा रहा है।
सुरक्षा के सर्वोच्च इंतजाम, सुबह 6 बजे खुले प्रेयर ग्राउंड के द्वार
ईरानी मीडिया 'फार्स न्यूज' के मुताबिक, तेहरान के गवर्नर मोहम्मद सादेघ मोतमेदियन ने बताया कि अंतिम विदाई समारोह को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के सर्वोच्च स्तर (हाई-अलर्ट) के इंतजाम किए गए हैं। शनिवार सुबह ठीक छह बजे तेहरान के प्रेयर ग्राउंड के गेट आम जनता के दर्शन के लिए खोल दिए गए। देश के दूर-दराज के इलाकों से लाखों की संख्या में लोग शुक्रवार से ही तेहरान पहुंचने लगे थे, जिससे सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

ताबूत पर लिपटा है 'कर्बला' का लाल झंडा
सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में अयातुल्ला अली खामेनेई का ताबूत एक खास लाल रंग के झंडे में लिपटा दिखाई दिया। इस झंडे पर सफेद रंग की कैलीग्राफी से 'या हुसैन' लिखा हुआ है। यह झंडा इराक के कर्बला में इमाम हुसैन की मजार से लाया गया है, जो शिया परंपरा में अन्याय के खिलाफ शहादत और खून का बदला लेने की पुकार का प्रतीक माना जाता है।

तनाव को देखते हुए ईरान ने चेतावनी दी है कि अंतिम संस्कार के दौरान यदि अमेरिका या इस्राइल ने कोई हिमाकत की, तो उसका भयंकर अंजाम भुगतना होगा। खामेनेई का ताबूत उन आम नागरिकों के ताबूतों के बीच रखा गया है जो इस्राइली हमलों में मारे गए थे।
भारत ने भी दी श्रद्धांजलि, इराक में भी बंद का एलान
खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व देखा जा रहा है। भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने शुक्रवार को समारोह में शामिल होकर भारत का प्रतिनिधित्व किया और श्रद्धांजलि दी।
इसके अलावा, पड़ोसी देश इराक में भी शोक की लहर है। बगदाद के गवर्नर अतवान अल-अतवानी ने घोषणा की है कि इस्लामी क्रांति के इस बड़े नेता की अंतिम यात्रा के सम्मान में बगदाद को पूरी तरह बंद रखा जाएगा। खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के हिस्से के रूप में ईरान के साथ-साथ इराक के भी पवित्र शिया शहरों में ले जाया जाएगा।
महीनों बाद दिखे जनरल वाहिदी, मोजतबा खामेनेई पर सस्पेंस
इस बेहद संवेदनशील माहौल के बीच ईरान के सबसे शक्तिशाली जनरलों में से एक और रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेतृत्व करने वाले जनरल अहमद वाहिदी महीनों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। वहीं दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अयातुल्ला के पुत्र और वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल न होने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे स्वयंसेवकों का कहना है कि वे देश के अपमान को न सहने की उसी पुरानी नीति पर अडिग रहेंगे, जिसकी शुरुआत उनके दिवंगत नेता ने की थी।
