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मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना टुकड़ा सहारा रेगिस्तान में मिला, नासा (NASA) के अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

'तेघाज़ा 001' उल्कापिंड खोलेगा लाल ग्रह के प्राचीन इतिहास और पानी के रहस्य, वैज्ञानिकों ने बताया मार्स का 'रोसेटा स्टोन'

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वाशिंगटन। वर्ष 2022 में सहारा रेगिस्तान में खोजे गए एक अनोखे गुलाबी रंग के पत्थर ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है। नासा (NASA) द्वारा वित्तपोषित वैज्ञानिकों की एक टीम ने अध्ययन के बाद यह पुष्टि की है कि लगभग 800 ग्राम (2 पाउंड) का यह पत्थर मंगल ग्रह (Mars) का एक टुकड़ा है, जो 4.1 अरब साल से भी अधिक पुराना है।

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माली के नमक के मैदान के नाम पर इसे 'तेघाज़ा 001' (Teghaza 001) नाम दिया गया है। यह धरती पर पाए गए मंगल ग्रह के सबसे पुराने उल्कापिंडों (Meteorites) में से एक है। हाल ही में प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका 'साइंस' (Science) में प्रकाशित एक शोध पत्र में इस उल्कापिंड की प्राथमिक विशेषताओं को साझा किया गया है, जो लाल ग्रह के निर्माण और उसके प्राचीन स्वरूप पर नई रोशनी डालता है।

वैज्ञानिकों ने क्यों कहा इसे मंगल का 'रोसेटा स्टोन'?

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) की मुख्य शोधकर्ता यांग लियू ने बताया कि जब इस उल्कापिंड की खनिज संरचना और बनावट का गहराई से अध्ययन किया गया, तो यह बेहद अनोखा निकला। समीक्षा करने वाले एक वैज्ञानिक ने इसे "मंगल ग्रह के लिए रोसेटा स्टोन" (इतिहास और रहस्यों की कुंजी) करार दिया है।

धरती पर अब तक मंगल ग्रह से आए लगभग 435 उल्कापिंड खोजे जा चुके हैं। लेकिन तेघाज़ा 001 इसलिए सबसे खास है क्योंकि इसकी आग्नेय (ज्वालामुखीय) खनिज संरचना मंगल की क्रस्ट (ऊपरी परत) के ठंडा होने और उस पर भूमिगत पानी के प्रभाव की पूरी कहानी बयान करती है।

मंगल ग्रह पर जल चक्र और वायुमंडल का गवाह 

नासा के एम्स रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक ली सेपर के अनुसार, "यह पहली बार है जब हमें मंगल ग्रह की क्रस्ट का ऐसा टुकड़ा मिला है जिसका नमूना हमारे पास पहले कभी नहीं था। यह चट्टान मंगल ग्रह पर पानी और पत्थरों के आपसी संपर्क तथा उस समय के वायुमंडल के इतिहास को दर्ज करती है जब लाल ग्रह से पानी कम हो रहा था।"

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह उल्कापिंड अंतरिक्ष में किसी बड़े प्रभाव (टक्कर) के कारण मंगल की सतह से टूटकर अलग हुआ होगा और सालों के सफर के बाद पृथ्वी पर आ गिरा।

उम्र निर्धारण की आधुनिक तकनीक का हुआ इस्तेमाल

प्रारंभ में इसे एक सामान्य उल्कापिंड माना जा रहा था, लेकिन जब नासा और कैलटेक (Caltech) के वैज्ञानिकों ने रूबिडियम-स्ट्रोंटियम डेटिंग (Rubidium-Strontium Age-Dating) तकनीक का उपयोग किया, तो इसके परिणाम चौंकाने वाले थे। वैज्ञानिकों ने इस पत्थर से मिले ज़िरकॉन क्रिस्टल (Zircon Crystals) के जरिए यह पता लगाया कि यह चट्टान 4.1 अरब साल पहले पानी के प्रभाव में आई थी, यानी इसका निर्माण उससे भी काफी पहले हुआ था।

कैलटेक के सह-लेखक फ्रेंकोइस टिसॉट ने बताया कि इस नई तकनीक की मदद से सिर्फ नाखून से भी छोटे हिस्से का विश्लेषण करके सटीक उम्र का पता लगाया गया, जिससे दुर्लभ नमूनों को नुकसान भी नहीं पहुंचता।

भविष्य के वैज्ञानिक अध्ययनों का नया द्वार

वैज्ञानिकों का मानना है कि 'तेघाज़ा 001' पर किए जा रहे शोध केवल शुरुआत हैं। आने वाले समय में यह उल्कापिंड यह समझने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा कि प्राचीन मंगल ग्रह पर पानी और चट्टानों का व्यवहार कैसा था और क्या कभी वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं।