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बदलते मौसम में वायरल का खतरा, बिना सलाह न दें एंटीबायोटिक

बढ़ रहीं मानसिक व विकास संबंधी समस्याएं: डॉक्टर संजय चौरसिया 

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हर शनिवार PMC हॉस्पिटल में निशुल्क परामर्श, स्पीच व फिजियोथेरेपी भी फ्री

वाराणसी। बदलते मौसम के साथ बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस संबंधी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इस विषय पर भदैनी मिरर से बातचीत में वाराणसी के प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ एवं PMC हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. संजय चौरसिया ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बिना चिकित्सकीय सलाह दवा न देने की सलाह दी है।

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डॉ. चौरसिया ने बताया कि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। नए वायरस के संपर्क में आने पर उनका शरीर तीव्र प्रतिक्रिया देता है, जिससे कफ, जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है। कई मामलों में वायरल संक्रमण के बाद ब्रोंकिओलाइटिस जैसी गंभीर स्थिति बन जाती है, जिसमें समय पर उपचार न मिले तो ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है।

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एंटीबायोटिक का गलत उपयोग


डॉक्टर चौरसिया कहते हैं कि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं, क्योंकि ये केवल बैक्टीरिया पर काम करती हैं। बावजूद इसके, कई अभिभावक बिना डॉक्टर की सलाह मेडिकल स्टोर से दवा लेकर बच्चों को दे देते हैं, जो गलत है। सामान्य वायरल फीवर में पैरासिटामोल और एंटी-एलर्जिक दवाएं चिकित्सकीय परामर्श से दी जा सकती हैं।

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अनावश्यक नेबुलाइजेशन नुकसानदेह 

नेबुलाइजेशन (भाप) को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती दो से तीन दिनों में सामान्य सर्दी-जुकाम में इसकी आवश्यकता नहीं होती। अनावश्यक नेबुलाइजेशन से बच्चों की धड़कन तेज हो सकती है और अन्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए इसे डॉक्टर की सलाह पर ही कराया जाए।


कमजोर होती इम्युनिटी के कारण


इम्युनिटी कमजोर होने के कारणों पर उन्होंने कहा कि अनियमित दिनचर्या, पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन और स्तनपान में कमी प्रमुख वजहें हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है। डब्बा बंद दूध पर निर्भर बच्चों में डायरिया और निमोनिया का खतरा अधिक रहता है। बड़े बच्चों को भी पैकेट जूस, कोल्ड ड्रिंक और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों से दूर रखना चाहिए। प्राकृतिक आहार जैसे दलिया, सत्तू और घर का बना भोजन बेहतर विकल्प हैं।

डॉ. चौरसिया ने चिंता जताई कि पिछले वर्षों में बच्चों में बोलने में देरी, हाइपरएक्टिविटी और अन्य मानसिक व विकास संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं। न्यूक्लियर परिवार व्यवस्था और कम सामाजिक संपर्क भी इसके कारणों में शामिल हैं।

PMC हॉस्पिटल की विशेष पहल

उन्होंने बताया कि PMC हॉस्पिटल में पिछले 14 वर्षों से हर शनिवार निशुल्क चिकित्सा सेवा दी जा रही है। इस दिन बच्चों के साथ महिलाओं का भी मुफ्त परामर्श किया जाता है। स्पीच थेरेपी और फिजियोथेरेपी की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध है। अब तक सवा लाख से अधिक मरीज इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं।


▪ अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
 

✔ बिना सलाह एंटीबायोटिक न दें।

✔ बच्चों का पूरा टीकाकरण कराएं।

✔ पैकेट जूस और फास्ट फूड से बचाएं।

✔ सांस फूलने या तेज बुखार में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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