Varanasi: एपेक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में राष्ट्रीय आर्थोपेडिक सम्मेलन ‘IATSCON 2026’ का शानदार आगाज, देशभर के डॉक्टरों ने साझा की जटिल सर्जरी की आधुनिक तकनीकें
निदेशक आईएमएस बीएचयू प्रो. डॉ. एस.एन. संखवार ने किया उद्घाटन; 'नॉन स्टॉप एकेडेमिक्स' थीम पर 100 से अधिक सर्जनों व पीजी छात्रों ने लिया हिस्सा, डॉ. अपूर्व को मिला गोल्ड मेडल
भदैनी मिरर । उत्तर प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी के एपेक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में दो दिवसीय प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आर्थोपेडिक सम्मेलन ‘IATSCON 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ ट्रॉमा सर्जन्स' (IATS) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ट्रॉमा एवं आर्थोपेडिक उपचार के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों को नवीनतम सर्जिकल तकनीकों से रूबरू कराना और मरीजों की सुरक्षा को और बेहतर बनाना रहा। यह आयोजन वाराणसी ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन एवं रोबोटिक आर्थ्रोप्लास्टी फाउंडेशन द्वारा उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में संपन्न हुआ।


वरिष्ठ चिकित्सविदों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ
सम्मेलन के शैक्षिक वैज्ञानिक सत्र का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. एस.एन. संखवार (निदेशक, आईएमएस बीएचयू) समेत आईएटीएस के प्रेसीडेंट डॉ. संदीप कुमार, महासचिव डॉ. भुवन सिंह, पैट्रन डॉ. एस.सी. गोयल, यूपीओए के प्रेसीडेंट डॉ. संतोष सिंह और आईओए सचिव डॉ. राजीव रंजन द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस गौरवमयी आयोजन की कमान ऑर्गेनाईजिंग चेयरपर्सन डॉ. अजीत सैगल, प्रेसीडेंट डॉ. एस.के. सिंह, सचिव डॉ. अमित जायसवाल और सह-सचिव डॉ. स्वरूप पटेल के हाथों में रही, जिन्होंने 'नॉन स्टॉप एकेडेमिक्स' थीम के तहत इस दो दिवसीय महामंथन को आकार दिया।

देशभर से आए विशेषज्ञों ने जटिल केसों पर किया मंथन
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, अमृतसर, पटना, चंडीगढ़ और वाराणसी सहित देश के विभिन्न कोनों से दिग्गज आर्थोपेडिक विशेषज्ञ बतौर फैकल्टी शामिल हुए। कार्यक्रम में 100 से अधिक डॉक्टरों और पीजी छात्रों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से इन जटिल विषयों और सर्जरी तकनीकों पर अपने शोध निष्कर्ष व व्याख्यान प्रस्तुत किए:
- पेल्विस एवं एसेटाबुलम फ्रैक्चर तथा दुर्घटनाओं में होने वाली जटिल अस्थि चोटें।
- बच्चों एवं वयस्कों में फीमर नेक फ्रैक्चर और टिबियल प्लेटो फ्रैक्चर का आधुनिक उपचार।
- ऑस्टियोपोरोसिस, स्पाइन टीबी, पॉलीट्रॉमा और निचले अंगों की जटिल चोटें।
- आधुनिक जोड़ प्रत्यारोपण (Joint Replacement) एवं पुनर्निर्माण (Reconstruction) सर्जरी।
"लुधियाना प्रोटोकॉल" और लाइव कार्यशाला रही मुख्य आकर्षण
सम्मेलन के दौरान आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. एन.के. अग्रवाल द्वारा 'कैप्टन डॉ. वी.एस. सिंह ओरेशन' के अंतर्गत घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार से संबंधित बेहद प्रसिद्ध “लुधियाना प्रोटोकॉल” पर विशेष वैज्ञानिक व्याख्यान दिया गया। इसके साथ ही, व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए डॉ. अजीत सैगल द्वारा 'एचटीओ प्लेट' और डॉ. अभिजीत वहगांवकर द्वारा 'डिस्टल एंड रेडियस' विषय पर लाइव कार्यशाला (Workshop) आयोजित की गई, जो युवा सर्जनों के लिए काफी ज्ञानवर्धक रही।
पीजी मेडल सत्र में चमके एपेक्स के डॉ. अपूर्व चहल
पोस्ट ग्रेजुएट (PG) छात्रों के क्लिनिकल अनुभव और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मेलन में एक विशेष 'पीजी मेडल सत्र' का आयोजन किया गया था। इसमें अपने बेहतरीन शोध और क्लिनिकल प्रस्तुतीकरण के बल पर एपेक्स हॉस्पिटल के डीएनबी रेजीडेंट डीएनबी डॉ. अपूर्व चहल ने स्वर्ण पदक (Gold Medal) पर कब्जा जमाया। वहीं, ओरियाना हॉस्पिटल के डॉ. शौर्य को शानदार प्रदर्शन के लिए रजत पदक (Silver Medal) प्रदान कर पुरस्कृत किया गया।
अंत में, ऑर्गेनाईजिंग चेयरपर्सन डॉ. अजीत सैगल ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए सभी आगंतुक डॉक्टरों, फैकल्टी मेंबर्स और शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सम्मेलन के सफल समापन की घोषणा की।
