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‘Psychogenic Epilepsy’ पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, कहा-हर झटका मिर्गी नहीं 

Institute of Medical Sciences, BHU के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के दो दर्जन से अधिक विशेषज्ञ शामिल; K. N. Udupa Auditorium में हुआ उद्घाटन
 

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वाराणसी। Banaras Hindu University के Institute of Medical Sciences, BHU के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा “Psychogenic Epilepsy” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन विश्वविद्यालय परिसर स्थित K. N. Udupa Auditorium में किया गया।

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इस सम्मेलन में देश-विदेश से न्यूरोलॉजी और साइकोलॉजी के दो दर्जन से अधिक विशेषज्ञ शामिल होकर Psychogenic Non-Epileptic Seizures (PNES) यानी मनोवैज्ञानिक कारणों से होने वाले दौरे पर विस्तृत चर्चा कर रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमएस-बीएचयू के निदेशक एवं डीन (मेडिसिन) प्रो. सत्य नारायण संखवार ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मीना गुप्ता (नारायणा हेल्थ, गुरुग्राम) मौजूद रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रो. टी.बी. सिंह, प्रो. संजय गुप्ता और डॉ. अभिषेक पाठक उपस्थित रहे।

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सम्मेलन का संयोजन न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्र ने किया। सह-संरक्षक के रूप में प्रो. सत्य नारायण संखवार और प्रो. संजय गुप्ता जुड़े रहे, जबकि प्रो. मनोज पांडेय (डीन रिसर्च, IMS-BHU) भी आयोजन से संबद्ध रहे।

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क्या होते हैं सीजर्स

विशेषज्ञों ने बताया कि सीजर (Seizure) मस्तिष्क में अचानक होने वाली अनियंत्रित विद्युत गतिविधि के कारण होता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार, शरीर की गतिविधियों, संवेदनाओं या चेतना में अचानक परिवर्तन हो सकता है।

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वहीं एपिलेप्सी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं। इनकी अवधि और तीव्रता अलग-अलग हो सकती है—कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक।


सीजर्स के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार दौरे पड़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • एपिलेप्सी
  • सिर में गंभीर चोट
  • मस्तिष्क संक्रमण (मेनिन्जाइटिस/एन्सेफलाइटिस)
  • स्ट्रोक
  • आनुवंशिक कारण
  • मेटाबॉलिक असंतुलन (जैसे हाइपोग्लाइसीमिया या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन)
  • ब्रेन ट्यूमर
  • दवाओं या नशे का अचानक बंद होना

क्या है PNES

Psychogenic Non-Epileptic Seizures (PNES) ऐसे दौरे होते हैं जो देखने में एपिलेप्सी के दौरे जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि नहीं होती। यह मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक कारणों से उत्पन्न होते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि PNES का सही निदान कई बार देर से होता है, जिसके कारण मरीजों को वर्षों तक गलत उपचार मिल सकता है। इसके सटीक निदान के लिए वीडियो-EEG मॉनिटरिंग को सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है।

PNES के आंकड़े और स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार PNES गैर-एपिलेप्टिक घटनाओं में सबसे सामान्य है। एपिलेप्सी सर्जरी के लिए संदर्भित मरीजों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत मामलों में PNES पाया जाता है।

इसकी अनुमानित घटना दर 1.5 से 3 प्रति लाख प्रति वर्ष है, जबकि सामान्य आबादी में इसकी प्रचलन दर 2 से 33 प्रति लाख तक हो सकती है। PNES के अधिकांश मामले महिलाओं में पाए जाते हैं और इनकी शुरुआत प्रायः युवावस्था में होती है।

जोखिम कारक


विशेषज्ञों ने बताया कि PNES के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं, जैसे—

  • बचपन के आघात या तनावपूर्ण अनुभव
  • पारिवारिक विवाद
  • स्कूल से जुड़ी समस्याएं
  • बुलिंग या सामाजिक संघर्ष
  • अवसाद और मानसिक तनाव
  • महिलाओं में कभी-कभी शारीरिक या मानसिक शोषण का इतिहास


उपचार और प्रबंधन

सम्मेलन में बताया गया कि PNES का उपचार मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सीय पद्धतियों से किया जाता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), मनोचिकित्सा, समूह एवं पारिवारिक काउंसलिंग इसके प्रभावी उपचार माने जाते हैं।

विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि PNES के सफल उपचार के लिए न्यूरोलॉजिस्ट और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की संयुक्त टीम द्वारा बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। साथ ही समय पर सही निदान, मरीज को बीमारी के बारे में स्पष्ट जानकारी और उपचार के प्रति उसकी सहमति बेहतर परिणाम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ PNES से जुड़े नवीन शोध, क्लिनिकल अनुभव और उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श करेंगे, जिससे इस जटिल समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और मरीजों के बेहतर उपचार का मार्ग प्रशस्त होगा।
 

 
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